JAINISM IN CHHATTISGARH छत्तीसगढ़ में जैन धर्म अत्यंत समृद्ध व प्राचीन रहा है। बस्तर से लेकर सरगुजा तक हजारों वर्षों पुराने जैन धर्म का जीवंत इतिहास

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JAINISM IN CHHATTISGARH

छत्तीसगढ़ में जैन धर्म अत्यंत समृद्ध व प्राचीन रहा है।

बस्तर से लेकर सरगुजा तक हजारों वर्षों पुराने जैन धर्म का जीवंत इतिहास

छत्तीसगढ़ में प्राचीनकाल से ही शैव, वैष्ण, शाक्य, बौद्ध एवं जैन धर्म की परंपरा रही है। छत्तीसगढ़ में जैन तीर्थंकरों की हजारों वर्षों पुरानी सकड़ों प्रतिमाएं आज भी खुदाई के दौरान मिलती है। छत्तीसगढ़ जैन युवा श्रीसंघ के प्रदेश अध्यक्ष अधि. प्रवीण जैन ने विभिन्न इतिहास की पुस्तकों के आधार पर स्थल एवं तथ्यों को पूरी प्रामाणिकता के साथ जानकारी देते हुए बतलाया है कि छत्तीसगढ़ में सभी धर्मों को समान रूप से पोषित किया गया। छत्तीसगढ़ में सर्वधर्म समभाव की परंपरा यहां प्राचीनकाल से ही चली आ रही है। छत्तीसगढ़ का पूर्व में प्रचलित नाम कौशल राज्य है, जहां जैन इतिहास लगभग ढाई हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। कुछ समय पूर्व ही राजिम में पुरातत्व खुदाई में भगवान पार्श्वनाथ की 1600 साल पुरानी प्रतिमा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सदियों से छत्तीसगढ़ में जैन धर्मावलंबी निवासरत है। दरअसल आदिवासी बहुल छत्तीसगढ़ के जंगल ऋषि – मुनियों की तपस्या के लिए उपयुक्त क्षेत्र रहे हैं। छत्तीसगढ़ में इसलिए श्रृंगी – ऋषि से लेकर वाल्मिकी आश्रम के प्रमाण मिलते है ।छत्तीसगढ़ में शैव , वैष्णव, बौद्ध और जैन धर्म के अनेक प्रमाण साक्ष्य हैं।
जांजगीर चांपा जिले के अंतर्गत चांपा से 50km दूरी पर दमऊदरहा नामक स्थान गूंजी या ऋषभ तीर्थ के नाम से जाना जाता है, यहां एक शिलालेख प्राप्त हुआ है जिस पर श्री भगवान के प्रतीक चिन्हों के साथ गायों के दान देने की बात प्राकृत भाषा ब्राम्ही लिपिबद्ध है, इस शिलालेख पर सातवाहन कालीन शासक कुमार वारदत्त के 5वे संवत में प्रवेश का उल्लेख है। इसके समीप एक राम लक्ष्मण मंदिर भी स्थापित है जिसमें भगवान ऋषभदेव की प्राचीन प्रतिमा भी स्थापित है।
बिलासपुर से 124km दूरी पर अडमार नामक स्थान है, जहां अष्ट भूजी माता के कल्चुरी शासकों का निर्माण किया मंदिर है जिसमें भगवान पार्श्वनाथ की 2 फिट ऊंची प्रतिमा स्थापित है।
अंबिकापुर से 40km की दूरी पर उदयपुर ग्राम में 8km क्षेत्रफल में 17 टीले स्थित है जिसमें प्राचीन जैन मंदिरों के भग्नावशेष तथा मूर्तियां 5 km के क्षेत्र में फैली हुई है, यहां एक शिलालेख भी है, जिसमें 18 वाक्य लिखे हैं। इन पुरातात्विक भग्नावेशों में वैष्णव, शैव जैन संप्रदाय के 30 बड़े मंदिर है। यहां 6वी शताब्दी की 104 सेमी. ऊंची अत्यंत दुर्लभ एवं प्राचीन ऋषभदेव भगवान की प्रतिमा स्थापित है।

रायपुर से 35km की दूरी पर स्थित आरंग जैन धर्मावलंबियों का एक कलात्मक एवं सुन्दर मंदिर स्थित है, जिसे भांड देवल के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर का निर्माण कल्चुरी नरेशों के शासनकाल में हुआ जो कि 12 शताब्दी ईस्वी का माना जाता है। इस मंदिर के गर्भगृह में जैन तीर्थंकरों नेमीनाथ, अजीतनाथ एवं श्रेयांशनाथ जी की 6 फिट ऊंची काले ग्रेनाइट पत्थरों की प्रतिमाएं स्थापित है। इसके अतिरिक्त अन्य मंदिर जिसे बाघ देवल एवं शिव मंदिर में जैन साधकों की मूर्तियां उत्क्रीन है साथ ही एक अन्य मंदिर जिसे महामाया मंदिर के नाम से जाना जाता है के प्रवेश द्वार पर जैन तीर्थंकरों की मूर्तियां स्थापित है।
बिलासपुर से 100km दूरी पर स्थित पैंड्रारोड से 16km धनपुर नामक ग्राम में जैन धर्म से संबंधित पुरावशेष बड़ी संख्या में पाए गए। यहां ऋषभ तालाब स्थित है जिसके समीप पेड़ के नीचे तीर्थंकर की प्रतिमा स्थापित है। यहां स्थित अनेक मंदिरों में अनेक जैन धर्म से संबंधित प्रतिमाएं रखी है। यहां स्थित भवन तारा तलाब से 3km की दूरी पर कई मंदिरों के भग्नावेश है जिसमें से 4 मंदिरों के भग्नावेश जैन मंदिरों के हैं। धनपुर से 2 km की दूरी पर एक विशाल चट्टान पर कार्योत्सर्ग मुद्रा में जैन तीर्थंकर ऋषभदेव जी की विशाल प्रतिमा उत्कीर्ण है जिसकी ऊंचाई 25 फिट है, छत्तीसगढ़ में यह एकमात्र इतनी बड़ी प्रतिमा है, जो शैलोतकीर्णीत जैन मूर्तिकला का एक अद्भुत उदाहरण है।
बैकुंठपुर से 32km घनघोर जंगलों में जोगीमठ ग्राम में जैन तीर्थंकर ऋषभदेव की 2 प्रतिमाएं 8वी की स्थापित है यहां प्राचीन ईंटों से निर्मित एक जैन मंदिर का भग्नावेश भी है जहां जैन मूर्तियां स्थित है।
महासमुंद जिसे के सिरपुर में 9वी शताब्दी की नवग्रह धातु की जैन तीर्थंकर ऋषभदेव जी की प्रतिमा प्राप्त हुई है। इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र में अनेकों जैन प्रतीक अवशेष प्राप्त हुए हैं।
बिलासपुर से 30 km ताला नमक ग्राम में देवरानी जेठानी मंदिर से खुदाई के दौरान पांचवी शताब्दी की प्रतिमाओं के साथ जैन तीर्थंकर ऋषभदेव जी की प्राचीन प्रतिमा प्राप्त हुई है।
बिलासपुर के रतनपुर में मां महामाया मंदिर की स्थली रतनपुर से कल्चुरी कालीन 12वी शताब्दी ईस्वी की भगवान ऋषभदेव की प्रतिमा प्राप्त हुई है साथ ही मंदिर के अंदर व द्वार पर जैन तीर्थंकरों की प्रतिमाएं अंकित है।
बिलासपुर से 35 km दूरी पर मल्हार ग्राम में अत्यंत प्राचीन ऋषभदेव भगवान की प्रतिमा संग्रहित की गई, इसके अतिरिक्त अनेकों जैन प्रतिमाएं एवं अवशेष की प्राप्ति यहां से हुई है। मल्हार के सोहागपुर में ठाकुर यशवर्धन सिंह के निजी संग्रहालय में सैकड़ों की संख्या में जैन प्रतिमाएं संग्रहित हैं।
रायपुर के संग्रहालय में भगवान ऋषभदेव जी की एक अत्यंत प्राचीन प्रतिमा के साथ छत्तीसगढ़ से प्राप्त अनेकों जैन प्रतिमाएं संग्रहित है।
इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ में जैन धर्म की संबंधित अत्यंत प्राचीन प्रतिमाएं हजारों की संख्या में मिली है जिसमें प्रमुख रूप से नेतनगर, नर्राटोला, कुर्रा, बम्हनी जो रायपुर जिले में स्थित है। कांकेर एवं बस्तर में जिलों में कई स्थानों में प्रतिमाएं प्राप्त हुई हैं, जिसमें जगदलपुर एवं गढ़बोदरा है। बिलासपुर के पंडरिया, पेंड्रा, पदमपुर के साथ राजिम, डोंगरगढ़ , गुंजी , खरौद, पाली , महेशपुर, शिवरीनारायण , दुर्ग , नगपुरा , भोरमदेव , सहित कई स्थान है जहां से भगवान आदिनाथ से लेकर प्रभु , पाश्र्वनाथ , प्रभु महावीर स्वामी , प्रभु अजितनाथ , प्रभु नेमीनाथ , प्रभु श्रेयांशनाथ , श्री चंद्र प्रभु प्रमुख है । स्थानों में भी जैन प्रतिमाएं प्राप्त हुई है। रामगढ़ की पहाड़ी पर स्थित प्राचीन नाट्य शाला में भी जैन धर्म का उल्लेख है । बकेला – देवसरा से प्राप्त प्रतिमा बारहवीं शताब्दी की है जो पंडरिया के जैन मंदिर में स्थापित है । सरगुजा के डीपाडीह की प्रतिमाएं दूसरी और तीसरी शताब्दी की है।
जैन धर्म के तीर्थंकरों को आज भी बैगा आदिवासी केंवट इत्यादि अनेकों जनजाति के लोग विभिन्न नामों से अपनी अपनी रिरिवाज और परंपराओं के आधार पर श्रद्धाभाव से पूजते हैं।
इस प्रकार कहा जा सकता है कि में जैन धर्म का इतिहास छत्तीसगढ़ में अत्यंत समृद्ध एवं प्राचीन रहा है, जो हमारे लिए गौरव की बात है।

अधि. प्रवीण जैन (अध्यक्ष)
छत्तीसगढ़ जैन युवा श्रीसंघ, 9329484701


संकलन संदर्भ

^ गर्ग 1992 , पृ. 578.
^ एक ख ग प्रांतों 1909 , पृ। २५९.
^ सुरजन और वर्मा १९९६ , पृ. 18.
^ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण १८७८ , पृ. 165.
^ “आरंग में मिली तीर्थंकर आदिनाथ की प्राचीन मूर्ति” । हितवाद । 19 मई 2016 से संग्रहीत मूल 20 मई 2016 को । 30 जून 2016 को लिया गया ।
^ ए बी जैन 1972 , पी। 446.
^ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण १८७८ , पृ. १६०.
^ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण १८७८ , पृ. १६१.
^ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण १८७८ , पृ. १६२.
^ शाह १९८७ , पृ. १५४.
^ बेगलर १८७८ , पृ. १६२.
^ “केंद्रीय रूप से संरक्षित स्मारक/स्थल/अवशेष, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण। रायपुर सर्कल, रायपुर” (पीडीएफ) । एएसआई । 10 फरवरी 2015 को लिया गया ।
^ एएसआई, रायपुर सर्कल ।

जैन विरुद्ध अनूप मंडल मामला:-

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अनोप मंडल के खिलाफ देश की पहली FIR मई 2014 में हुई थी रायपुर में दर्ज

साइबर सेल की टीम ने बेवसाइट व फेसबुक पेज कराया था प्रतिबंधित

अनूप मंडल के अनुयायियों द्वारा शिकायत करता को कई बार दी गई थी जान से मारने की धमकी

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आपदा से क्षतिग्रस्त जनजीवन को पटरी पर लाने जीवनचर्या में बदलाव लाएगा जैन समाज

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आपदा से क्षतिग्रस्त जनजीवन को पटरी पर लाने जीवनचर्या में बदलाव लाएगा जैन समाज

0 जैन संवेदना ट्रस्ट समेत जैन समाज के विभिन्न संगठनों ने किया एक जूम एप मीटिंग में विमर्श

रायपुर. वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण की विकट आपदा ने पिछले वर्ष से लेकर अब तक सामाजिक जनजीवन को बुरी तरह क्षतिग्रस्त किया है. इससे जन-धन की क्षति तो हुई ही है, लोगों के मन पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ा है. तन को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले मन का स्वस्थ होना आवश्यक है. स्वस्थ तन के माध्यम से ही व्यक्ति आरोग्य, सम्पदा व सुख-शांति प्राप्त कर पाता है. क्षतिग्रस्त जनजीवन को सुख-शांति व आरोग्य, सम्पदा की पटरी पर पुन: लाने के लिए जैन समाज के विभिन्न संगठनों ने आज रविवार को एक विशेष वेबिनार का आयोजन किया. जिसमें प्रमुख रूप से जैन संवेदना ट्रस्ट सहित भगवान महावीर जन्मकल्याण महोत्सव समिति-2021, सकल जैन समाज , उवसग्गहरम तीर्थ , कच्छी दशा ओसवाल जैन समाज , छत्तीसगढ़ जैन युवा श्री संघ , जैन सेवा समिति , जीतो लेडिस विंग बी जे एस और जैन समाज के विभिन्न संगठनों की भागीदारी रही.
आपदा काल में समाज के हर वर्ग के परिवारों में हुई जन-धन व आरोग्य की क्षति से उबरने परिस्थिति अनुरूप जीवनशैली में क्या बदलाव लाएं जाएं यह इस जूम एप मीटिंग का प्रमुख विषय रहा. जैन संवेदना ट्रस्ट के महेन्द्र कोचर व विजय चोपड़ा ने कहा- इस संकट की घड़ी में अनेक परिवार विपदाग्रस्त हुए, जन और धन की हानि का सामना करना पड़ा. बीती ताही बिसार दे-आगे की सुधि ले इस सोच पर केंद्रित होकर अब हमें अपनी परम्परागत जीवन शैली में परिस्थिति अनुरूप आंशिक बदलाव लाना नितांत आवश्यक है. भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव समिति के संरक्षक गजराज पगारिया व अध्यक्ष महेन्द्र कोचर ने इस दौरान सामाजिक सरोकार के तहत पृथक से एक सामाजिक गाइडलाइन बनाने की जरूरत पर बल दिया. उनके इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए सभी ने अपनी सहमति प्रदान की. जिसके तहत यह निर्णय लिया गया कि सामाजिक सरोकार के तहत बनाई गई इस सामाजिक गाइडलाइन का पालन शासन के लॉकडाउन-अनलॉक की प्रक्रिया समाप्त होने और शासकीय गाइडलाइन की अनिवार्यता खत्म होने के बाद भी आगामी लम्बे समय तक किया जाए.

सामाजिक गाइडलाइन के तहत लिए गए कई निर्णय
महोत्सव समिति के अध्यक्ष महेन्द्र कोचर व महासचिव चंद्रेश शाह ने बताया कि सभी संगठन प्रमुखों के विचारों पर मंथन करने के बाद सर्व सहमति से बनाई गई सामाजिक गाइडलाइन के तहत जनजीवन की बेहतरी के लिए अनेक प्रभावी निर्णय लिए गए. जिनमें प्रमुख रूप से
1. शादी-विवाह आदि मांगलिक कार्यक्रमों में व्यक्तियों की संख्या सीमित अर्थात् 50 व्यक्तियों से ज्यादा संख्या नहीं होगी.
2. अंतिम संस्कार सहित उठावना, शोक मिलन के कार्यक्रम केवल परिजनों के बीच ही संपन्न किए जाएंगे.
3. तेरहवीं पर मृत्यु भोज या सामाजिक सामूहिक मिलन का कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाए. इसके स्थान पर शोक संवेदनाएं व संदेश फोन अथवा सोशल मीडिया के माध्यम से स्वीकार किए जाने की अपील की जाए.
4. जन्म दिन, विवाह वर्षगांठ के कार्यक्रम भी सादगीपूर्ण मनाया जाए.
5. बच्चे के जन्म से पहले के गोद भराई और जन्म के बाद के कार्यक्रम भी परिजनों के बीच ही कराए जाने की अपील की जाए.
6. सामाजिक कार्यक्रमों के तहत जुलूस-जलसे इनमें भी किसी प्रकार का कोई आडम्बर न करते हुए केवल सांकेतिक रूप से परम्परा का निर्वहन करने का निर्णय लिया गया. सीमित संख्या में लोगों की उपस्थिति में ये कार्यक्रम बिना किसी बैंड-बाजे, ढोल के ही संपन्न कराए जाएं.
7. धार्मिक अनुष्ठान भी केवल घर-घर में ही हों, सार्वजनिक रूप से आयोजन न किया जाए.
जूम एप मीटिंग में गजराज पगारिया , महेन्द्र कोचर, विजय चोपड़ा सहित प्रमुख रूप से कमल भंसाली, चंद्रेश शाह, प्रवीण जैन, मोती जैन ,कुसुम श्रीश्रीमाल , रेणु गोलछा , महावीर कोचर ने अपने विचार रखे. साथ ही वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह सामाजिक गाइडलाइन हमारे परिवारों व समाज की सुरक्षा और बेहतरी के लिए बनाई गई है. जिसके तहत लिए गए निर्णय मूल रूप में समाज की सामूहिक अपील है.जैन समाज के विभिन्न पदाधिकारियों से चर्चा कर आम सहमति बनाई जावेगी । विजय चोपड़ा व कमल भंसाली ने कहा कि समाजहित की इस अपील को अपने निजी जीवन में कड़े नियम के तौर पर लिया जाए. साथ ही यह भी कहा गया कि इस सामाजिक गाइडलाइन का पालन शासकीय गाइडलाइन के निष्प्रभावी होने के बाद भी जब तक आपदा अथवा संकट काल पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक किया जाता रहेगा.

दिगंबर जैन युवक युवतियों के विवाह संस्कार में आने वाली कठिनाइयों के समाधान के लिए समिति गठित

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दिगंबर जैन युवक युवतियों के विवाह संस्कार में आने वाली कठिनाइयों के समाधान के लिए समिति गठित

रायपुर: जैन समाज में विवाह योग्य युवक युवतियों की शादी में अविभावकों को अनेकों समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, अमूमन देखा जा रहा है कि रिश्ते नही मिल पाने की वजह से शादी होने में बहुत ज्यादा विलंब व कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, इसके अनेक कारण है, जिनमें से एक प्रमुख कारण समाज में लड़कियों के शिक्षा का प्रतिशत लड़कों से अधिक होना है, समाज में लड़कों और लड़कियों की संख्या में अंतर भी इसका एक बड़ा कारण है। आज के युवा करिअर को प्राथमिकता दे रहे हैं, व्यापार, व्यवसाय और नौकरी में एक मुकाम हासिल करने के बाद शादी करना चाहते हैं, चूंकि जैन समाज व्यापारिक पृष्टभूमि वाला समाज होने की वजह से समाज के अधिकतर लड़के कम उम्र में व्यवसाय में लग जाते हैं और कम पढ़ पाते हैं, लेकिन लड़कियां अब हायर एजुकेशन और करिअर पर फोकस कर रही हैं। अधिकांश लड़कियां बड़े शहर में ही शादी करना चाहती हैं। इसमें भी समान प्रोफेशन वालों को तवज्जो दी जा रही है, जिसकी वजह से भी शादी संबंधों में सही रिश्ते नही मिल पाते, इसके अलावा सम्प्रदाय, कुंडली व गोत्र मिलान भी बड़ी समस्या है, इन सभी वजहों से दोनो पक्षों के लोग भटकते रहते हैं। इन सभी समस्याओं का समाधान बहुत मुश्किल है किंतु असंभव नही है। इन समस्यों के समाधान के लिए वीर फाउंडेशन द्वारा दिगंबर जैन समाज के विवाह योग्य युवक युवतियों के बॉयोडाटा संग्रह एवं दो पक्षों के तालमेल कराने का कार्य प्रारंभ किया जा रहा है, फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने जानकारी देते हुए बतलाया कि आज भगवान आदिनाथ स्वामी के पारणा दिवस आखातीज के शुभ अवसर पर इस पुनीत कार्य की शुरुआत मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के दिगंबर जैन समाज को शामिल कर किया जा रहा है, यदि इस दिशा में आशातीत सफलता मिलती है तो इसका दायरा भविष्य में श्वेताम्बर जैन समाज व अन्य राज्यों में भी बढ़ाया जायेगा। प्रवीण जैन ने आगे बतलाया कि हमारे द्वारा सामाजिक संस्था दिगंबर जैन विवाह संस्कार का गठन आज आखातीज पर किया गया है, प्रारंभिक चरण में संरक्षक के रूप में श्रीमती ममता अजय जैन तथा कार्यकारणी सदस्यों में राहुल जैन गंगवाल, यशवंत जैन, पंडित संजय जैन और स्मिता जैन (अधिवक्ता) को शामिल किया है तथा आगे समाज के प्रबुद्धजनों को भी समिति से जोड़ा जायेगा। दिगंबर जैन विवाह संस्कार के लिए एक हेल्पलाइन Whatsaap नम्बर 9302038157 भी जारी किया गया है।

वीर फाउंडेशन 9329484701

भगवान महावीर जन्मोत्सव में आयोजित ऑनलाइन सांस्कृतिक प्रतियोगिता के परिणाम घोषित

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भगवान महावीर जन्मोत्सव में आयोजित ऑनलाइन सांस्कृतिक प्रतियोगिता के परिणाम घोषित

भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में छत्तीसगढ़ जैन युवा श्रीसंघ और भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव समिति रायपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित जैन समाज की धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक परंपराओ के अनुरूप ऑनलाइन भजन, गायन, पूजन, पाठ्य, सांस्कृतिक प्रस्तुति के वीडियो आमंत्रित किए गए थे, जिसमें सैकड़ों की संख्या में प्रदेश भर से प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। छत्तीसगढ़ जैन युवा श्रीसंघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण जैन ने जानकारों देते हुए बतलाया कि इस प्रतियोगिता में परफॉर्मेन्स के आधार पर ऑनलाइन पब्लिक ओपिनियन लिया गया और निर्णायक राहुल जैन एवं श्रीमती नीतू बोथरा द्वारा निर्णय दिया गया जो इस प्रकार हैं: जूनियर वर्ग में नृत्य प्रस्तुति में प्रथम जागृति सखलेचा, द्वितीय खुशी चोपड़ा, तृतीय धरिया बैद व युक्ति जैन , इसी तरह भजन गायन में संयुक्त रूप से प्रथम हार्दिक और आभाष, द्वितीय ऋषभ जैन व मानविक संचेती तथा तृतीय पलक लोढ़ा व महक लुनिया रहे, साथ ही 12 जैन राइजिंग स्टार्स का भी चयन किया गया।

सभी वर्गों के प्रतिभागियों की टॉप 10 सूचीं

जूनियर डांस अवार्ड में प्रतिभागी क्रमांक 250 विजय लुंकड़ को विज्ञा लूंकड पढा जाए। सीनियर वर्ग के नृत्य प्रस्तुति में प्रथम पूनम बैद, द्वितीय प्रेक्षा तातेड़ तथा तृतीय मिष्ठी जैन रही। भजन गायन में प्रथम डॉ. नितेश जैन, द्वितीय संयुक्त रूप से श्रीमती आस्था जैन, पूर्वी छाजेड़ तथा तृतीय डॉ. प्रिया जैन रही। अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुति में प्रथम प्रिया सांखला, द्वितीय मिहिर व मिनिषा तातेड़ तथा तृतीय तेजल कासलीवाल रही। सभी विजेताओं को भगवान महावीर जन्मकल्याणक समिति के अध्यक्ष महेंद्र कोचर, विजय चोपड़ा, कमल भंसाली, चंद्रेश शाह, सुशील कोचर व महावीर कोचर ने बधाई दी है।

आयोजक
अधि. प्रवीण जैन
प्रदेश अध्यक्ष
छत्तीसगढ़ जैन युवा श्रीसंघ, 9329484701

कोरोना ने जिन परिवारों से मुखिया छीन लिया, उन्हें स्वावलम्बी बनाने मदद करेगा जैन संवेदना ट्रस्ट

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कोरोना ने जिन परिवारों से मुखिया छीन लिया उन्हें स्वावलम्बी बनाने मदद करेगा जैन संवेदना ट्रस्ट (more…)

वॉल्फोर्ड JPL- जैन प्रीमियर लीग 5 में स्वस्तिक, अरिहंत और सांखला ब्रदर्स की जीत

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वॉल्फोर्ड जैन प्रीमियर लीग में स्वस्तिक, अरिहंत और सांखला ब्रदर्स की जीत

राजधानी के सुभाष स्टेडियम में वीर स्पोर्ट्स क्लब द्वारा आयोजित वॉल्फोर्ड जैन प्रीमियर लीग रात्रिकालीन क्रिकेट प्रतियोगिता के पांचवे संस्करण में मंगलवार को कुल तीन मैच खेले गए। क्लब के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने जानकारी देते हुए बतलाया कि दिन का पहला मैच बिजमार्क ब्लू और स्वस्तिक 11 के मध्य खेला गया, बिजमार्क ब्लू ने टॉस जीत कर पहले क्षेत्ररक्षण का निर्णय लिया, पहले बल्लेबाजी करते हुए स्वस्तिक 11 ने निर्धारित ओवरों में 6 विकेटों के नुकसान पर नमन जैन की 34 गेंदों पर आतिशी 85 रनों की बदौलत 126 रनों के बड़ा स्कोर खड़ा किया, जबाव में बिजमार्क के बल्लेबाज महज 29 रन ही बना सके। दिन का दूसरा मैच अरिहंत 11 और एलीट 11 के मध्य खेला गया, पहले बल्लेबाजी करते हुए एलीट के बल्लेबाज 71 रनों पर ऑलआउट हो गए, अरिहंत 11 ने इस लक्ष्य को 8 ओवरों में ही प्राप्त कर लिया, इस मैच में सौरभ ने 26 रन और दो विकेट को चुना गया।
दिन का तीसरा और अंतिम मैच सांखला ब्रदर्स और स्वर्ण भूमि के मध्य खेला गया, पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 विकेटों पर 127 रनों के लक्ष्य निर्धारित किया, जिसके जबाव में स्वर्णभूमि 8 विकेट पर 51 रन ही बना सकी, मैच में ऑलराउंडर प्रदर्शन करने वाले सौरभ 24 रन और 3 विकेट को मैन ऑफ द मैच चुना गया।

वीर स्पोर्ट्स क्लब 9329484701

जैन संगोष्ठी – वर्तमान मे जैन समाज की राजनीतिक दशा-दिशा

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Jago Jain Kahi Der Na Ho Jaye

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Jhanda Viran – 15/08/2015

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