कांग्रेस स्पोर्ट्स सेल का Yoga For Strength

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खेल कांग्रेस और वीरजी आयुर्वेदिक संस्थान की संयुक्त प्रस्तुति “YOGA for STRENGTH-2” ऑनलाइन योग प्रतियोगिता आयोजित

माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी के आह्वान एवं कांग्रेस अध्यक्ष श्री मोहन मरकाम जी के निर्देशन पर वैश्विक कोरोना महामारी से निपटने नागरिकों में रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने योग व आयुर्वेद को जीवनशैली में शामिल करने के उद्देश्य से विश्व योग दिवस के अवसर पर प्रतीकात्मक ऑनलाइन योग प्रतियोगिता आयोजित कराई जा रही है। प्रतिभागियों को प्रज्ञा योग, अष्टांगा विन्यासा एवं सूर्य नमस्कार में से कोई भी 2 को अधिकतम 1 मिनट का वीडियो नाम व शहर का नाम बोलते हुए 7771001701 पर 14-15 जून तक WhatsApp करना है। 100 चयनित वीडियो को Facebook पेज *छत्तीसगढ़ खेल महासंघ* पर 17 जून को अपलोड किया जायेगा, परफॉर्मेन्स के 80% व पब्लिक ओपिनियन के 20% अंक प्रदान किए जाएंगे। 21 जून को Top 10 विजेताओं व सभी चयनित नामों की घोषणा के साथ प्रमाणपत्र व पुरस्कार वितरण राजीव भवन, शंकर नगर, रायपुर में किया जायेगा।
आयोजक:-
अधि. प्रवीण जैन
प्रदेश अध्यक्ष
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (खेलकूद प्रकोष्ठ)

संयोजक :- योगज्योति
समन्वयक :- सुश्री अन्नपूर्णा टिकरिहा

जैन विरुद्ध अनूप मंडल मामला:-

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अनोप मंडल के खिलाफ देश की पहली FIR मई 2014 में हुई थी रायपुर में दर्ज

साइबर सेल की टीम ने बेवसाइट व फेसबुक पेज कराया था प्रतिबंधित

अनूप मंडल के अनुयायियों द्वारा शिकायत करता को कई बार दी गई थी जान से मारने की धमकी

(more…)

झीरमघाटी में शहीद नेताओं को कांग्रेस स्पोर्ट्स सेल ने दी श्रद्धांजलि छत्तीसगढ़ प्रीमियर लीग और खिलाड़ी सम्मान समारोह झीरमघाटी शहीद नेताओं की स्मृति में होगा आयोजित

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झीरमघाटी में शहीद नेताओं को कांग्रेस स्पोर्ट्स सेल ने दी श्रद्धांजलि

छत्तीसगढ़ प्रीमियर लीग और खिलाड़ी सम्मान समारोह झीरमघाटी शहीद नेताओं की स्मृति में होगा आयोजित

रायपुर: झीरमघाटी शहीदी दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (खेलकूद प्रकोष्ठ) के द्वारा वर्चुअल बैठक रख अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई, इस अवसर पर सभी पदाधिकारियों ने अपने अपने विचार प्रस्तुत किए, बैठक को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ खेल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण जैन ने कहा कि है हमारे द्वारा प्रदेश के सभी प्रतिभावान खिलाड़ियों को विवत 3 वर्षों से खेल दिवस के अवसर पर झीरमघाटी शहीदों के नाम से खेल अलंकरण दिया जाता है, बैठक में यह सहमति बनी कि इस वर्ष भी प्रदेश भर में प्रत्येक जिलों में 29 अगस्त को शहीदों के नाम से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाएगा, प्रवीण जैन ने प्रदेश पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि कोरोना से संक्रमित लोगों और जरूरतमंदों की मदद हम सभी खुले दिल से करे और छत्तीसगढ़ के प्रत्येक खिलाड़ी तक छत्तीसगढ़ का स्पोर्ट्स एप्लिकेशन सी.जी. स्पोर्ट्स का लाभ दिलाये, बैठक में प्रवीण जैन ने प्रदेश में आयोजित होने वाले प्रदेश के सबसे बड़े क्रिकेट आयोजन छत्तीसगढ़ प्रीमियर लीग को झीरमघाटी शहीदों की स्मृति में कराये जाने का प्रस्ताव रखा जो ध्वनिमत से पारित हुआ। बैठक को पीयूष डागा, भविष्य चंद्राकर अगरतला, मो. इमरान, अमित दीवान, सुमित सिंह भिलाई, गोल्डी नायक सरंगगढ़, अनामिका शुक्ला बिलासपुर, बिपलब मल्लिक दंतेवाड़ा, तरुण राय धमतरी, अनपूर्णा टिकरिहा बेमेतरा, निर्मल सिंह कोरबा, आकाश राव कांकेर, कमलेश यदु गरियाबंद, अजित गुप्ता बलरामपुर, मनमोहन सिंह मुंगेली, रमेश अग्रवाल रायगढ़, रवि राठौर, रीना चौरसिया जांजगीर, विनेश दौलतानी, अनुराग भंडारी सहित काफी संख्या में पदधिकागन बैठक में उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (खेलकूद प्रकोष्ठ) 7771001701

योग और आयुर्वेद का आपस में क्या संबंध है?

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आयुर्वेद एवं योग (Ayurveda and Yoga)

योग का संबंध आयुर्वेद से क्यों हैं? दरअसल हमारे ऋषि-मुनियों ने योग के साथ ही आयुर्वेद को जन्म दिया। इसके पीछे कारण यह कि वे सैकड़ों वर्ष तक जिंदा रहकर ध्‍यान और समाधि में गति करना चाहते थे। इसके चलते उन्होंने दोनों ही चिकित्सा पद्धति को अपने ‍जीवन का अंग बनाया।

निश्चित ही योग करते हुए आप स्वस्थ रह सकते हैं लेकिन प्रकृति की शक्ति आपकी शक्ति से भी ज्यादा है और मौसम की मार सभी पर रह सकती है। हिमालय में प्राणायाम के अभ्यास से शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखा जा सकता है, लेकिन मान लो कोई गंभीर रोग हो ही गया तो फिर क्या कर सकते हैं। ऐसे में उन्होंने कई चमत्कारिक जड़ी-बुटियों की खोज की जो व्यक्ति को तुरंत तंदुरुस्त बनाकर दीर्घजीवन प्रदान करे।

आयुर्वेद एक प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति है। बहुत से ऐसे रोग और मानसिक विकार हो सकते हैं जिस पर योग कंट्रोल न भी कर पाए तो आयुर्वेद उसका विकल्प बन जाता है और बहुत से ऐसे रोग भी होते हैं जिसे आयुर्वेद न भी कंट्रोल कर पाए तो योग उसका विकल्प बन जाता है।

योग करते हुए सिर्फ और सिर्फ आयुर्वेदिक चिकित्सा का ही लाभ लेना चाहिए, क्योंकि योग आपके शरीर की प्रकृति को सुधारता है। योग और आयुर्वेद का संबंध अटूट है।

योग और आयुर्वेद के इस अटूट बंधन को एक सूत्र में पिरोने वीरजी आयुर्वेदिक संस्थान द्वारा लगातार  लगातार 12 वर्षों तक मनेंद्रगढ़ में सेवा देने के पश्चात अब  राजधानी रायपुर में सम्पूर्ण आयुर्वेदिक, प्राकृतिक, पंचकर्म एवं योग चिकित्सा की शुरूआत की जा रही है, संस्थान के संचालक प्रफुल जैन ने बतलाया कि एक ही छत के नीचे आयुर्वेदिक दवाइयों से लेकर सम्पूर्ण ईलाज की व्यवस्था उनके द्वारा चालू की जा रही है तथा सम्पूर्ण आयुर्वेदिक पद्दति से सभी सामान्य एवं जटिल रोगों का इलाज संभव हो सकेगा। किसी भी तरह की जानकारी के लिए 9691147111 पर सम्पर्क किया जा सकता है।

योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सेवाएं

योग चिकित्सा सेवा

योग मुख्यतः एक जीवन पद्धति है,  इसमें यम, नियम, आसन,प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान व समाधि आठ अंग है। योग के इन अंगों के अभ्यास से सामाजिक तथा व्यक्तिगत आचरण में सुधार आता है, शरीर में ऑक्सीजन युक्त रक्त के भली-भॉति संचार होने से शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, इंद्रियां संयमित होती है तथा मन को शांति एवं पवित्रता मिलती है। योग के अभ्यास से मनोदैहिक विकारों/व्याधियों की रोकथाम, शरीर में प्रतिरोधक शक्ति की बढोतरी तथा तनावपूर्ण परिस्थितियों में सहनशक्ति की क्षमता आती है। ध्यान का, जो आठ अंगो में से एक है, यदि नियमित अभ्यास किया जाए तो शारीरिक अहितकर प्रतिक्रियाओं को घटाने की क्षमता बढती है, जिससे मन को सीधे ही अधिक फलदायक कार्यो में संलग्न किया जा सकता है।

यद्यपि योग मुख्यतः एक जीवन पद्धति है, तथापि, इसके प्रोत्साहक, निवारक और रोगनाशक अन्तःक्षेप प्रभावोत्पादक है। योग के ग्रंथो में स्वास्थ्य के सुधार, रोगों की रोकथाम तथा रोगों के उपचार के लिए कई आसानों का वर्णन किया गया है । शारीरिक आसनों का चुनाव विवेकपूर्ण ढंग से करना चाहिए। रोगों की रोकथाम, स्वास्थ्य की उन्नति तथा चिकित्सा के उद्देश्‍यों की दृष्टि से उनका सही चयन कर सही विधि से अभ्यास करना चाहिए ।

अध्ययनों से यह प्रदर्शि‍त होता है कि योगिक अभ्यास से बुद्धि तथा स्मरण शक्ति बढती है तथा इससे थकान एवं तनावो को सहन करने, सहने की शक्ति को बढाने मे तथा एकीकृत मनोदेहिक व्यक्तित्व के विकास में भी मदद मिलती है। ध्यान एक दूसरा व्यायाम है, जो मानसिक संवेगों मे स्थिरता लाता है तथा शरीर के मर्मस्थलों के कार्यो को असामान्य करने से रोकता है । अध्ययन से देखा गया है कि ध्यान न केवल इन्द्रियों को संयमित करता है, बल्कि तंत्रिका तंत्र को भी नियंमित करता है।

योग के वास्तविक प्राचीन स्वरूप की उत्पत्ति औपनिषदिक परम्परा का अंग है। तत्व ज्ञान एवं तत्वानुभूति के साधन के रूप में योग का विकास किया गया।

 

 

”योगशिचत्तवृत्ति निरोधः”

 

 

शरीर एवं मन को स्वस्थ रखने के लिए अष्टाडंग योग की व्याख्या की गई जो निम्न प्रकार है।

यम-  ”अंहिसासत्यास्तेयब्रहचर्यापरिग्रहा यमाः”

अहिंसा, सत्य, अस्तेय,ब्रहचर्य और अपरिग्रह को यम कहा गया है।

– ” शौचसंतोषतपःस्वाध्यायेश्‍वरप्रणिधानानि नियमाः”

शौच, संतोष, तप स्वाध्याय और ईश्‍वर प्रणिधान ये पांच नियम कहे है।

 

 

 

आसन- ” स्थिर सुखमासनम्‌”

जो स्थिर एवं सुखदायक हो वह आसन कहा है।

 

 

 

मोटे तौर पर योगासनों को तीन वर्गो में बांटा जा सकता है।

 

 

ध्यानात्मक आसन- यथा सिद्धासन, पद्मासन भद्रासन स्वस्तिकासन आदि।

 

 

 

विश्रांतिकर आसन-  शवासन, दण्डासन, मकरासन आदि।

 

 

 

शरीर संवर्धनात्मक आसन-  सिंहासन, गोमुकासन धनुरासन आदि

 

 

 

प्राणायाम- ”तस्मिन्‌ सति श्वासप्रश्‍वासयोर्गतिविच्छेदः प्राणायामः”

आसन के स्थिर हो जाने पर श्वास प्रश्‍वास की गति को रोकना प्राणायाम कहा गया है।

 

यह बाह्‌यवृति, आभ्यान्तरवृति और स्तम्भवृति तीन प्रकार का कहा गया है।

 

 

 

प्रत्याहार-” स्वविषयासम्प्रयोगे चित्तस्य स्वरूपानुकार इवेन्द्रियाणां प्रत्याहारः”

अपने विषयो के साथ सम्बन्ध न होने पर चित्त के स्वरूप का अनुसरण करना इन्द्रियों का प्रत्याहार कहलाता है।

 

 

 

धारणा-” देशबन्धशिचत्तस्य धारणा”

चित्त (मन) का वृत्ति मात्र से किसी स्थान विशेष में बांधना धारणा कहलाता है।

 

 

 

ध्यान- ”तत्र प्रत्ययैकतानता ध्यानम्‌”

उस (धारणा) में वृत्ति का एक सा बना रहना ध्यान कहलाता है।

 

 

 

समाधि- ” तदेवार्थमात्रनिर्भासं स्वरूपशून्यमिव समाधिः”

जब केवल ध्येय ही अर्थ मात्र से भासता है और उसका स्वरूप शून्य हो जाता है वह ध्यान ही समाधि कहलाता है।

 

 

 

उपरोक्त प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि उत्तरोत्तर श्रेष्ठतर अवस्थाएं है।

 

 

प्राकृतिक चिकित्सा सेवा

 

 

प्राकृतिक चिकित्सा न केवल उपचार की पद्धति है, अपितु यह एक जीवन पद्धति है । इसे बहुधा औषधि विहीन उपचार पद्धति कहा जाता है। यह मुख्य रूप से प्रकृति के सामान्य नियमों के पालन पर आधारित है। जहॉ तक मौलिक सिद्धांतो का प्रश्‍न है इस पद्धति का आयुर्वेद से निकटतम सम्बन्ध है।

 

प्राकृतिक चिकित्सा के समर्थक खान-पान एवं रहन सहन की आदतों, शुद्धि कर्म, जल चिकित्सा, ठण्डी पट्टी, मिटटी की पट्टी, विविध प्रकार के स्नान, मालिश तथा अनेक नई प्रकार की चिकित्सा विधाओं पर विशेष बल देते है।

 

 

मिट्टी चिकित्साः-

 

 

मिट्टी जिसमें पृथ्वी तत्व की प्रधानता है जो कि शरीर के विकारों विजातीय पदार्थो को निकाल बाहर करती है। यह कीटाणु नाशक है जिसे हम एक महानतम औषधि कह सकते है।

 

 

 

मिट्टी की पट्टी का प्रयोगः-

 

 

उदर विकार, विबंध, मधुमेह, शि‍र दर्द, उच्च रक्त चाप ज्वर, चर्मविकार आदि रोगों में किया जाता है। पीडित अंगों के अनुसार अलग अलग मिट्टी की पट्टी बनायी जाती है।

 

 

 

वस्ति (एनिमा):-

 

 

उपचार के पूर्व इसका प्रयोग किया जाता जिससे कोष्ट शुद्धि हो। रोगानुसार शुद्ध जल नीबू जल, तक्त, निम्ब क्वाथ का प्रयोग किया जाता है।

 

 

 

जल चिकित्साः-

 

 

इसके अन्तर्गत उष्ण टावल से स्वेदन, कटि स्नान, टब स्नान, फुट बाथ, परिषेक, वाष्प स्नान, कुन्जल, नेति आदि का प्रयोग वात जन्य रोग पक्षाद्घात राधृसी, शोध, उदर रोग, प्रतिश्‍याय, अम्लपित आदि रोगो में किया जाता है।

सूर्य रश्मि चिकित्साः-

सूर्य के प्रकाश के सात रंगो के द्वारा चिकित्सा की जाती है।यह चिककित्‍सा शरीर मे उष्‍णता बढाता है स्‍नायुओं को उत्‍तेजित करना वात रोग,कफज,ज्‍वर,श्‍वास,कास,आमवात पक्षाधात, ह्रदयरोग, उदरमूल, मेढोरोग वात जन्‍यरोग,शोध चर्मविकार, पित्‍तजन्‍य रोगों में प्रभावी हैं।

उपवास-

सभी पेट के रोग, श्वास, आमवात, सन्धिवात, त्वक विकार, मेदो वृद्धि आदि में विशेष उपयोग होता है।

योग एवं प्राकृतिक चिकित्‍सालय व औषधालय की सूची

योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सेवाएं
योग चिकित्सा सेवा
योग मुख्यतः एक जीवन पद्धति है, जिसे पतंजलि ने क्रमबद्ध ढंग से प्रस्तुत किया था। इसमें यम, नियम, आसन,प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान व समाधि आठ अंग है। योग के इन अंगों के अभ्यास से सामाजिक तथा व्यक्तिगत आचरण में सुधार आता है, शरीर में ऑक्सीजन युक्त रक्त के भली-भॉति संचार होने से शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, इंद्रियां संयमित होती है तथा मन को शांति एवं पवित्रता मिलती है। योग के अभ्यास से मनोदैहिक विकारों/व्याधियों की रोकथाम, शरीर में प्रतिरोधक शक्ति की बढोतरी तथा तनावपूर्ण परिस्थितियों में सहनशक्ति की क्षमता आती है। ध्यान का, जो आठ अंगो में से एक है, यदि नियमित अभ्यास किया जाए तो शारीरिक अहितकर प्रतिक्रियाओं को घटाने की क्षमता बढती है, जिससे मन को सीधे ही अधिक फलदायक कार्यो में संलग्न किया जा सकता है।

यद्यपि योग मुख्यतः एक जीवन पद्धति है, तथापि, इसके प्रोत्साहक, निवारक और रोगनाशक अन्तःक्षेप प्रभावोत्पादक है। योग के ग्रंथो में स्वास्थ्य के सुधार, रोगों की रोकथाम तथा रोगों के उपचार के लिए कई आसानों का वर्णन किया गया है । शारीरिक आसनों का चुनाव विवेकपूर्ण ढंग से करना चाहिए। रोगों की रोकथाम, स्वास्थ्य की उन्नति तथा चिकित्सा के उद्देश्‍यों की दृष्टि से उनका सही चयन कर सही विधि से अभ्यास करना चाहिए ।

अध्ययनों से यह प्रदर्शि‍त होता है कि योगिक अभ्यास से बुद्धि तथा स्मरण शक्ति बढती है तथा इससे थकान एवं तनावो को सहन करने, सहने की शक्ति को बढाने मे तथा एकीकृत मनोदेहिक व्यक्तित्व के विकास में भी मदद मिलती है। ध्यान एक दूसरा व्यायाम है, जो मानसिक संवेगों मे स्थिरता लाता है तथा शरीर के मर्मस्थलों के कार्यो को असामान्य करने से रोकता है । अध्ययन से देखा गया है कि ध्यान न केवल इन्द्रियों को संयमित करता है, बल्कि तंत्रिका तंत्र को भी नियंमित करता है।

योग के वास्तविक प्राचीन स्वरूप की उत्पत्ति औपनिषदिक परम्परा का अंग है। तत्व ज्ञान एवं तत्वानुभूति के साधन के रूप में योग का विकास किया गया।

”योगशिचत्तवृत्ति निरोधः”

शरीर एवं मन को स्वस्थ रखने के लिए अष्टाडंग योग की व्याख्या की गई जो निम्न प्रकार है।

यम- ”अंहिसासत्यास्तेयब्रहचर्यापरिग्रहा यमाः”
अहिंसा, सत्य, अस्तेय,ब्रहचर्य और अपरिग्रह को यम कहा गया है।

नियम- ” शौचसंतोषतपःस्वाध्यायेश्‍वरप्रणिधानानि नियमाः”
शौच, संतोष, तप स्वाध्याय और ईश्‍वर प्रणिधान ये पांच नियम कहे है।

आसन- ” स्थिर सुखमासनम्‌”
जो स्थिर एवं सुखदायक हो वह आसन कहा है।

मोटे तौर पर योगासनों को तीन वर्गो में बांटा जा सकता है।

ध्यानात्मक आसन- यथा सिद्धासन, पद्मासन भद्रासन स्वस्तिकासन आदि।

विश्रांतिकर आसन- शवासन, दण्डासन, मकरासन आदि।

शरीर संवर्धनात्मक आसन- सिंहासन, गोमुकासन धनुरासन आदि

प्राणायाम- ”तस्मिन्‌ सति श्वासप्रश्‍वासयोर्गतिविच्छेदः प्राणायामः”
आसन के स्थिर हो जाने पर श्वास प्रश्‍वास की गति को रोकना प्राणायाम कहा गया है।

यह बाह्‌यवृति, आभ्यान्तरवृति और स्तम्भवृति तीन प्रकार का कहा गया है।

प्रत्याहार-” स्वविषयासम्प्रयोगे चित्तस्य स्वरूपानुकार इवेन्द्रियाणां प्रत्याहारः”
अपने विषयो के साथ सम्बन्ध न होने पर चित्त के स्वरूप का अनुसरण करना इन्द्रियों का प्रत्याहार कहलाता है।

धारणा-” देशबन्धशिचत्तस्य धारणा”
चित्त (मन) का वृत्ति मात्र से किसी स्थान विशेष में बांधना धारणा कहलाता है।

ध्यान- ”तत्र प्रत्ययैकतानता ध्यानम्‌”
उस (धारणा) में वृत्ति का एक सा बना रहना ध्यान कहलाता है।

समाधि- ” तदेवार्थमात्रनिर्भासं स्वरूपशून्यमिव समाधिः”
जब केवल ध्येय ही अर्थ मात्र से भासता है और उसका स्वरूप शून्य हो जाता है वह ध्यान ही समाधि कहलाता है।

उपरोक्त प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि उत्तरोत्तर श्रेष्ठतर अवस्थाएं है।

प्राकृतिक चिकित्सा सेवा

प्राकृतिक चिकित्सा न केवल उपचार की पद्धति है, अपितु यह एक जीवन पद्धति है । इसे बहुधा औषधि विहीन उपचार पद्धति कहा जाता है। यह मुख्य रूप से प्रकृति के सामान्य नियमों के पालन पर आधारित है। जहॉ तक मौलिक सिद्धांतो का प्रश्‍न है इस पद्धति का आयुर्वेद से निकटतम सम्बन्ध है।

प्राकृतिक चिकित्सा के समर्थक खान-पान एवं रहन सहन की आदतों, शुद्धि कर्म, जल चिकित्सा, ठण्डी पट्टी, मिटटी की पट्टी, विविध प्रकार के स्नान, मालिश तथा अनेक नई प्रकार की चिकित्सा विधाओं पर विशेष बल देते है।

मिट्टी चिकित्साः-

मिट्टी जिसमें पृथ्वी तत्व की प्रधानता है जो कि शरीर के विकारों विजातीय पदार्थो को निकाल बाहर करती है। यह कीटाणु नाशक है जिसे हम एक महानतम औषधि कह सकते है।

मिट्टी की पट्टी का प्रयोगः-

उदर विकार, विबंध, मधुमेह, शि‍र दर्द, उच्च रक्त चाप ज्वर, चर्मविकार आदि रोगों में किया जाता है। पीडित अंगों के अनुसार अलग अलग मिट्टी की पट्टी बनायी जाती है।

वस्ति (एनिमा):-

उपचार के पूर्व इसका प्रयोग किया जाता जिससे कोष्ट शुद्धि हो। रोगानुसार शुद्ध जल नीबू जल, तक्त, निम्ब क्वाथ का प्रयोग किया जाता है।

जल चिकित्साः-

इसके अन्तर्गत उष्ण टावल से स्वेदन, कटि स्नान, टब स्नान, फुट बाथ, परिषेक, वाष्प स्नान, कुन्जल, नेति आदि का प्रयोग वात जन्य रोग पक्षाद्घात राधृसी, शोध, उदर रोग, प्रतिश्‍याय, अम्लपित आदि रोगो में किया जाता है।

सूर्य रश्मि चिकित्साः-

सूर्य के प्रकाश के सात रंगो के द्वारा चिकित्सा की जाती है।यह चिककित्‍सा शरीर मे उष्‍णता बढाता है स्‍नायुओं को उत्‍तेजित करना वात रोग,कफज,ज्‍वर,श्‍वास,कास,आमवात पक्षाधात, ह्रदयरोग, उदरमूल, मेढोरोग वात जन्‍यरोग,शोध चर्मविकार, पित्‍तजन्‍य रोगों में प्रभावी हैं।

उपवास-

सभी पेट के रोग, श्वास, आमवात, सन्धिवात, त्वक विकार, मेदो वृद्धि आदि में विशेष उपयोग होता है।

योग एवं प्राकृतिक चिकित्‍सालय व औषधालय की सूची

आपदा से क्षतिग्रस्त जनजीवन को पटरी पर लाने जीवनचर्या में बदलाव लाएगा जैन समाज

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आपदा से क्षतिग्रस्त जनजीवन को पटरी पर लाने जीवनचर्या में बदलाव लाएगा जैन समाज

0 जैन संवेदना ट्रस्ट समेत जैन समाज के विभिन्न संगठनों ने किया एक जूम एप मीटिंग में विमर्श

रायपुर. वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण की विकट आपदा ने पिछले वर्ष से लेकर अब तक सामाजिक जनजीवन को बुरी तरह क्षतिग्रस्त किया है. इससे जन-धन की क्षति तो हुई ही है, लोगों के मन पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ा है. तन को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले मन का स्वस्थ होना आवश्यक है. स्वस्थ तन के माध्यम से ही व्यक्ति आरोग्य, सम्पदा व सुख-शांति प्राप्त कर पाता है. क्षतिग्रस्त जनजीवन को सुख-शांति व आरोग्य, सम्पदा की पटरी पर पुन: लाने के लिए जैन समाज के विभिन्न संगठनों ने आज रविवार को एक विशेष वेबिनार का आयोजन किया. जिसमें प्रमुख रूप से जैन संवेदना ट्रस्ट सहित भगवान महावीर जन्मकल्याण महोत्सव समिति-2021, सकल जैन समाज , उवसग्गहरम तीर्थ , कच्छी दशा ओसवाल जैन समाज , छत्तीसगढ़ जैन युवा श्री संघ , जैन सेवा समिति , जीतो लेडिस विंग बी जे एस और जैन समाज के विभिन्न संगठनों की भागीदारी रही.
आपदा काल में समाज के हर वर्ग के परिवारों में हुई जन-धन व आरोग्य की क्षति से उबरने परिस्थिति अनुरूप जीवनशैली में क्या बदलाव लाएं जाएं यह इस जूम एप मीटिंग का प्रमुख विषय रहा. जैन संवेदना ट्रस्ट के महेन्द्र कोचर व विजय चोपड़ा ने कहा- इस संकट की घड़ी में अनेक परिवार विपदाग्रस्त हुए, जन और धन की हानि का सामना करना पड़ा. बीती ताही बिसार दे-आगे की सुधि ले इस सोच पर केंद्रित होकर अब हमें अपनी परम्परागत जीवन शैली में परिस्थिति अनुरूप आंशिक बदलाव लाना नितांत आवश्यक है. भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव समिति के संरक्षक गजराज पगारिया व अध्यक्ष महेन्द्र कोचर ने इस दौरान सामाजिक सरोकार के तहत पृथक से एक सामाजिक गाइडलाइन बनाने की जरूरत पर बल दिया. उनके इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए सभी ने अपनी सहमति प्रदान की. जिसके तहत यह निर्णय लिया गया कि सामाजिक सरोकार के तहत बनाई गई इस सामाजिक गाइडलाइन का पालन शासन के लॉकडाउन-अनलॉक की प्रक्रिया समाप्त होने और शासकीय गाइडलाइन की अनिवार्यता खत्म होने के बाद भी आगामी लम्बे समय तक किया जाए.

सामाजिक गाइडलाइन के तहत लिए गए कई निर्णय
महोत्सव समिति के अध्यक्ष महेन्द्र कोचर व महासचिव चंद्रेश शाह ने बताया कि सभी संगठन प्रमुखों के विचारों पर मंथन करने के बाद सर्व सहमति से बनाई गई सामाजिक गाइडलाइन के तहत जनजीवन की बेहतरी के लिए अनेक प्रभावी निर्णय लिए गए. जिनमें प्रमुख रूप से
1. शादी-विवाह आदि मांगलिक कार्यक्रमों में व्यक्तियों की संख्या सीमित अर्थात् 50 व्यक्तियों से ज्यादा संख्या नहीं होगी.
2. अंतिम संस्कार सहित उठावना, शोक मिलन के कार्यक्रम केवल परिजनों के बीच ही संपन्न किए जाएंगे.
3. तेरहवीं पर मृत्यु भोज या सामाजिक सामूहिक मिलन का कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाए. इसके स्थान पर शोक संवेदनाएं व संदेश फोन अथवा सोशल मीडिया के माध्यम से स्वीकार किए जाने की अपील की जाए.
4. जन्म दिन, विवाह वर्षगांठ के कार्यक्रम भी सादगीपूर्ण मनाया जाए.
5. बच्चे के जन्म से पहले के गोद भराई और जन्म के बाद के कार्यक्रम भी परिजनों के बीच ही कराए जाने की अपील की जाए.
6. सामाजिक कार्यक्रमों के तहत जुलूस-जलसे इनमें भी किसी प्रकार का कोई आडम्बर न करते हुए केवल सांकेतिक रूप से परम्परा का निर्वहन करने का निर्णय लिया गया. सीमित संख्या में लोगों की उपस्थिति में ये कार्यक्रम बिना किसी बैंड-बाजे, ढोल के ही संपन्न कराए जाएं.
7. धार्मिक अनुष्ठान भी केवल घर-घर में ही हों, सार्वजनिक रूप से आयोजन न किया जाए.
जूम एप मीटिंग में गजराज पगारिया , महेन्द्र कोचर, विजय चोपड़ा सहित प्रमुख रूप से कमल भंसाली, चंद्रेश शाह, प्रवीण जैन, मोती जैन ,कुसुम श्रीश्रीमाल , रेणु गोलछा , महावीर कोचर ने अपने विचार रखे. साथ ही वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह सामाजिक गाइडलाइन हमारे परिवारों व समाज की सुरक्षा और बेहतरी के लिए बनाई गई है. जिसके तहत लिए गए निर्णय मूल रूप में समाज की सामूहिक अपील है.जैन समाज के विभिन्न पदाधिकारियों से चर्चा कर आम सहमति बनाई जावेगी । विजय चोपड़ा व कमल भंसाली ने कहा कि समाजहित की इस अपील को अपने निजी जीवन में कड़े नियम के तौर पर लिया जाए. साथ ही यह भी कहा गया कि इस सामाजिक गाइडलाइन का पालन शासकीय गाइडलाइन के निष्प्रभावी होने के बाद भी जब तक आपदा अथवा संकट काल पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक किया जाता रहेगा.

दिगंबर जैन युवक युवतियों के विवाह संस्कार में आने वाली कठिनाइयों के समाधान के लिए समिति गठित

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दिगंबर जैन युवक युवतियों के विवाह संस्कार में आने वाली कठिनाइयों के समाधान के लिए समिति गठित

रायपुर: जैन समाज में विवाह योग्य युवक युवतियों की शादी में अविभावकों को अनेकों समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, अमूमन देखा जा रहा है कि रिश्ते नही मिल पाने की वजह से शादी होने में बहुत ज्यादा विलंब व कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, इसके अनेक कारण है, जिनमें से एक प्रमुख कारण समाज में लड़कियों के शिक्षा का प्रतिशत लड़कों से अधिक होना है, समाज में लड़कों और लड़कियों की संख्या में अंतर भी इसका एक बड़ा कारण है। आज के युवा करिअर को प्राथमिकता दे रहे हैं, व्यापार, व्यवसाय और नौकरी में एक मुकाम हासिल करने के बाद शादी करना चाहते हैं, चूंकि जैन समाज व्यापारिक पृष्टभूमि वाला समाज होने की वजह से समाज के अधिकतर लड़के कम उम्र में व्यवसाय में लग जाते हैं और कम पढ़ पाते हैं, लेकिन लड़कियां अब हायर एजुकेशन और करिअर पर फोकस कर रही हैं। अधिकांश लड़कियां बड़े शहर में ही शादी करना चाहती हैं। इसमें भी समान प्रोफेशन वालों को तवज्जो दी जा रही है, जिसकी वजह से भी शादी संबंधों में सही रिश्ते नही मिल पाते, इसके अलावा सम्प्रदाय, कुंडली व गोत्र मिलान भी बड़ी समस्या है, इन सभी वजहों से दोनो पक्षों के लोग भटकते रहते हैं। इन सभी समस्याओं का समाधान बहुत मुश्किल है किंतु असंभव नही है। इन समस्यों के समाधान के लिए वीर फाउंडेशन द्वारा दिगंबर जैन समाज के विवाह योग्य युवक युवतियों के बॉयोडाटा संग्रह एवं दो पक्षों के तालमेल कराने का कार्य प्रारंभ किया जा रहा है, फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने जानकारी देते हुए बतलाया कि आज भगवान आदिनाथ स्वामी के पारणा दिवस आखातीज के शुभ अवसर पर इस पुनीत कार्य की शुरुआत मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के दिगंबर जैन समाज को शामिल कर किया जा रहा है, यदि इस दिशा में आशातीत सफलता मिलती है तो इसका दायरा भविष्य में श्वेताम्बर जैन समाज व अन्य राज्यों में भी बढ़ाया जायेगा। प्रवीण जैन ने आगे बतलाया कि हमारे द्वारा सामाजिक संस्था दिगंबर जैन विवाह संस्कार का गठन आज आखातीज पर किया गया है, प्रारंभिक चरण में संरक्षक के रूप में श्रीमती ममता अजय जैन तथा कार्यकारणी सदस्यों में राहुल जैन गंगवाल, यशवंत जैन, पंडित संजय जैन और स्मिता जैन (अधिवक्ता) को शामिल किया है तथा आगे समाज के प्रबुद्धजनों को भी समिति से जोड़ा जायेगा। दिगंबर जैन विवाह संस्कार के लिए एक हेल्पलाइन Whatsaap नम्बर 9302038157 भी जारी किया गया है।

वीर फाउंडेशन 9329484701

ऑनलाइन स्वस्थ प्रतियोगित के 15 विजेता चुने गए स्वस्थ छत्तीसगढ़ अभियान के ब्रांड एम्बेसडर

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  1. ऑनलाइन स्वस्थ प्रतियोगित के 15 विजेता चुने गए स्वस्थ छत्तीसगढ़ अभियान के ब्रांड एम्बेसडर

रायपुर: छत्तीसगढ़ में कोविड 19 संक्रमण के बढ़ते केसों के मद्देनजर प्रदेश के नागरिकों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (खेलकूद प्रकोष्ठ) द्वारा “मेरी सरकार मेरी जिम्मेदारी” अभियान के अंतर्गत स्वस्थ छत्तीसगढ़ प्रतियोगिता का आयोजन कराया गया, जिसमें प्रदेश भर के सैकड़ों प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, इस प्रतियोगिता में योग, ध्यान, खेलकूद, व्यायाम के अभ्यास, साफ सफाई व कोरोना बचाव के संदेश इत्यादि के वीडियो आमंत्रित किए गए, परफॉर्मेंस और शोसल मीडिया में जनता की राय लेकर इनमें से 15 प्रतिभागियों का चयन स्वस्थ छत्तीसगढ़ अभियान के ब्रांड अम्बेसडर के रूप में किया गया, छत्तीसगढ़ खेल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण जैन ने प्रतियोगिता के विजेताओं के नामों की घोषणा की जिनमें प्रथम अन्नपूर्णा टिकहरिहा बेमेतरा, द्वितीय दीपक वर्मा सिमगा, तृतीय दिव्या वर्मा कुम्हारी, क्रमशः अभिजीत सरकार मनेन्द्रगढ़, वर्षा साहू रायपुर, विजया साव रायपुर, पुरुषोत्तम निषाद बलौदाबाजार, वर्षा रानी, कोटमी, शेखर वर्मा, राजनांदगांव, बेदान्त बजाज रायपुर, रुचि साहू रायपुर, साक्षी गजभिये गुढ़ियारी, रमेश अग्रवाल, सरंगगढ़, रायगढ़, सरिता पारख रायपुर मुरली शर्मा रायपुर ने प्रतियोगिता के विजेता रहे। इन सभी विजेताओं के वीडियो सोशल मीडिया में जनजागरूकता के लिए उपयोग किए जाएंगे तथा 29 अगस्त खेल दिवस पर सभी को प्रमाणपत्र व पुरस्कार प्रदान किया जायेगा।

छत्तीसगढ़ खेल कांग्रेस 7771001701

भगवान महावीर जन्मोत्सव में आयोजित ऑनलाइन सांस्कृतिक प्रतियोगिता के परिणाम घोषित

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भगवान महावीर जन्मोत्सव में आयोजित ऑनलाइन सांस्कृतिक प्रतियोगिता के परिणाम घोषित

भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में छत्तीसगढ़ जैन युवा श्रीसंघ और भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव समिति रायपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित जैन समाज की धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक परंपराओ के अनुरूप ऑनलाइन भजन, गायन, पूजन, पाठ्य, सांस्कृतिक प्रस्तुति के वीडियो आमंत्रित किए गए थे, जिसमें सैकड़ों की संख्या में प्रदेश भर से प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। छत्तीसगढ़ जैन युवा श्रीसंघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण जैन ने जानकारों देते हुए बतलाया कि इस प्रतियोगिता में परफॉर्मेन्स के आधार पर ऑनलाइन पब्लिक ओपिनियन लिया गया और निर्णायक राहुल जैन एवं श्रीमती नीतू बोथरा द्वारा निर्णय दिया गया जो इस प्रकार हैं: जूनियर वर्ग में नृत्य प्रस्तुति में प्रथम जागृति सखलेचा, द्वितीय खुशी चोपड़ा, तृतीय धरिया बैद व युक्ति जैन , इसी तरह भजन गायन में संयुक्त रूप से प्रथम हार्दिक और आभाष, द्वितीय ऋषभ जैन व मानविक संचेती तथा तृतीय पलक लोढ़ा व महक लुनिया रहे, साथ ही 12 जैन राइजिंग स्टार्स का भी चयन किया गया।

सभी वर्गों के प्रतिभागियों की टॉप 10 सूचीं

जूनियर डांस अवार्ड में प्रतिभागी क्रमांक 250 विजय लुंकड़ को विज्ञा लूंकड पढा जाए। सीनियर वर्ग के नृत्य प्रस्तुति में प्रथम पूनम बैद, द्वितीय प्रेक्षा तातेड़ तथा तृतीय मिष्ठी जैन रही। भजन गायन में प्रथम डॉ. नितेश जैन, द्वितीय संयुक्त रूप से श्रीमती आस्था जैन, पूर्वी छाजेड़ तथा तृतीय डॉ. प्रिया जैन रही। अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुति में प्रथम प्रिया सांखला, द्वितीय मिहिर व मिनिषा तातेड़ तथा तृतीय तेजल कासलीवाल रही। सभी विजेताओं को भगवान महावीर जन्मकल्याणक समिति के अध्यक्ष महेंद्र कोचर, विजय चोपड़ा, कमल भंसाली, चंद्रेश शाह, सुशील कोचर व महावीर कोचर ने बधाई दी है।

आयोजक
अधि. प्रवीण जैन
प्रदेश अध्यक्ष
छत्तीसगढ़ जैन युवा श्रीसंघ, 9329484701

कोरोना ने जिन परिवारों से मुखिया छीन लिया, उन्हें स्वावलम्बी बनाने मदद करेगा जैन संवेदना ट्रस्ट

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