छत्तीसगढ़ राज्य के क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा सीसीपीएल: प्रवीण जैन

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रायपुर: प्रदेश में काफी लंबे अरसे बाद पेशेवर क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए एक बहुत ही अच्छा प्लेटफार्म छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ द्वारा दिया गया है, यह कदम स्वागत योग्य है, बीते 5 वर्षों से हम छत्तीसगढ़ को अपना ऑफिशियल लीग दिलाने की मांग कर रहे थे जिसका सपना आज पूरा होने जा रहा है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी खेलकूद प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने बतलाया कि प्रदेश को इसी तरह के क्रिकेट लीग की आवश्यकता थी, इससे प्रदेश में क्रिकेट का ग्राफ काफी तेजी से बढ़ेगा और हमारे छत्तीसगढ़िया खिलाड़ी अंतराष्ट्रीय स्तर पर तैयार हो सकेंगे। हमारे द्वारा भी लगातार इसी दिशा में छत्तीसगढ़ प्रीमियर लीग प्रतियोगिता का लगातार 2 वर्षों तक आयोजन किया गया था लेकिन बहुत ही सीमित संशासनों की वजह से उसका स्तर बहुत संकुचित था, फिर भी हमनें नवोदित खिलाड़ियों अवसर देने का प्रयास किया, आगे भी हम सीएससीएस के सहयोग से ऐसे ही प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अवसर देते रहेंगे। हमें इस बात की काफी खुशी है कि प्रदेश में आज से सीसीपील जैसी बड़ी और बीसीसीआई से मान्यता प्राप्त प्रतियोगिता का आगाज हो रहा है, जिससे प्रदेश में क्रिकेट के क्षेत्र में नई क्रांति आयेगी और यह आगे चलकर मिल का पत्थर साबित होगी। इस आयोजन की शुरुवात करने के लिए बीसीसीआई सहित छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के संरक्षण श्री बलदेव सिंह भाटिया एवं सभी पदाधिकारी बधाई के पत्र हैं।

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी खेलकूद प्रकोष्ठ 7771001701

कांग्रेस कॉरपोरेट क्रिकेट टूर्नामेंट में दुर्ग फोर्स चैंपियन

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प्रदेश कांग्रेस स्पोर्ट्स सेल द्वारा आयोजित कॉरपोरेट क्रिकेट टूर्नामेंट रायपुर के गॉस मेमोरियल खेल मैदान में सम्पन्न हुआ, इस टूर्नामेंट में उद्योग और व्यापार जगत की 16 टीमों ने हिस्सा लिया, जिसका फाइनल मुकाबला 20 जनवरी 2019 रविवार सम्पन्न हुआ, कांग्रेस स्पोर्ट्स सेल के प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण जैन ने जानकारी देते हुए बतलाया कि टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला फोर्स 11 दुर्ग और ट्रांसपोर्ट संघ रायपुर के मध्य खेला गया, फोर्स 11 ने टॉस जीत कर पहले क्षेत्ररक्षण करने का निर्णय लिया, पहले बल्लेबाजी करते हुए ट्रांसपोर्ट संघ ने रोहन 43 की मदद से निर्धारित 10 ओवरों में 80 रन बनाये, फोर्स की ओर से दिव्यांश ने 3 महत्वपूर्ण विकेट लिए। लक्ष्य का पीछा करने उतरी फोर्स 11 ने राज के 29 व देवेंद्र के 23 रनों के योगदान से 9 ओवरों में लक्ष्य हासिल कर लिया। मैन ऑफ द मैच राज को घोषित किया गया, फाइनल मुकाबले में रमेश मोदी, जैन जितेंद्र बरलोटा, गजराज पगारिया, इंदरचंद धाड़ीवाल, पारस चोपड़ा, प्रकाश सुराणा, सीए संतोष जैन, नरेंद्र अग्रवाल, श्रीमती किरणमई नायक, प्रेमचंद लुनावत, कन्हैया अग्रवाल, राजेन्द्र जग्गी, विनोद नायक सहित सभी अथितियों ने टूर्नामेंट में उत्कृष्ट खिलाड़ियों को पुरस्कार प्रदान किया।
बेस्ट बॉलर का खिताब दिव्यांश को प्राप्त हुआ जिसने टूर्नामेंट में 8 विकेट प्राप्त किया, बेस्ट बेस्टमैन तथा मैन ऑफ द सीरीज का खिताब सौरभ को गया।
आयोजन में पीयुष डागा, मनोज बोथरा, राहुल जैन का महत्वपूर्ण योगदान प्राप्त हुआ।

अधि. प्रवीण जैन
अध्यक्ष
कांग्रेस स्पोर्ट्स सेल

आरएसएस-बीजेपी के इन नेताओं और कार्यकर्ताओं पर दंगा भड़काने, दंगा करने, डकैती और हत्या की कोशिश के आरोप में मामला दर्ज हुआ था।

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आरएसएस-बीजेपी के इन नेताओं और कार्यकर्ताओं पर दंगा भड़काने, दंगा करने, डकैती और हत्या की कोशिश के आरोप में मामला दर्ज हुआ था। जो दिल्ली की अलग-अलग अदालतों में अब भी लंबित है।

इन FIR में जो सबसे बड़ा नाम शामिल है वो है राजकुमार जैन। FIR NO.- 446/93 और FIR NO.- 315/92 इन दोनों ही में राजकुमार का नाम है।

राजकुमार बड़ा नाम इसलिए है, क्योंकि ये संघ नेता होने के साथ-साथ हाल ही में चल बसे पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेई का चुनाव एजेंट भी था। (02/02/2002 में छपे हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार में साफ़ देखा जा सकता है)
संघ के बड़े नेता नानाजी देशमुख ने सिखों के नरसंहार को न्याय के समक्ष सही ठहराया था। शम्सुल की मानें तो नानाजी देशमुख अपने एक दस्तावेज़ में लिखते हैं कि, भीड़ नहीं, बल्कि सिख बुद्धिजीवी नरसंहार के लिए जिम्मेवार हैं।

उन्होंने सिखों को खाड़कू समुदाय बना दिया है और हिन्दू मूल से अलग कर दिया है, इस तरह राष्ट्रवादी भारतीयों से हमले को न्यौता दिया है। यहां फिर वे सभी सिखों को एक ही गिरोह का हिस्सा मानते हैं और हमले को राष्ट्रवादी हिन्दुओं की एक प्रतिक्रिया।

इस तरह पित्रोदा के बयान के बाद कांग्रेस पर हमलावर बीजेपी और संघ के नेताओं को अपने गिरेहबान में झांककर देखने चाहिए कि दंगों के मामले में उनका इतिहास क्या रहा है।

कौशल नंदनी और स्वाति साहू खेलने जाएंगे हंगरी

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रविशंकर विश्वविद्यालय द्वारा कयाकिंग केनॉयिंग में गोल्डमेडलिस्ट खिलाड़ियों को अंतरष्ट्रीय यूनिवर्सिटी खेलों में हंगरी भेजने से यह कहते हुए मना कर दिया कि उनके ऊपर आने वाला 4.32 लाख का खर्च वह वहन करने पर असमर्थ है जिसके बाद कांग्रेस स्पोर्ट्स सेल द्वारा खिलाड़ियों के हित में विश्विद्यालय प्रबंधन को आड़े हांथों लिया जिसके बाद खिलाड़ियों का हंगरी जाने का रास्ता साफ हुआ।

अधि. प्रवीण जैन

अध्यक्ष

राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ प्रदेश का सबसे बड़ा क्रिकेट आयोजन की तैयारी..

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युवाओं को खेल संस्कृति से जोड़ने के उद्देश्य से विगत जनवरी माह में वीर फाउंडेशन द्वारा जैन प्रीमियर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन कराया गया था जिसको जैन समाज के साथ प्रत्येक वर्ग का भरपूर समर्थन प्राप्त हुआ था। उक्त सफलतम आयोजन को आगे बढ़ाते हुये वीर फाउंडेशन द्वारा विशुद्ध रूप से खेल आयोजनों के लिए वीर स्पोर्ट्स क्लब का गठन कर छत्तीसगढ़ प्रदेश का नाम अखिल भारतीय स्तर पर आयोजक के रूप में पहुंचाने, प्रदेश के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर मंच प्रदान करने राज्य में खेलों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से अखिल भारतीय स्तर पर छत्तीसगढ़ प्रदेश का सबसे वृहद क्रिकेट आयोजन कराया जा रहा है। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए वीर फाउंडेशन के प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण जैन, कार्यकारी अध्यक्ष मनोज बोथरा, महामंत्री राहुल जैन, मीडिया प्रभारी जैन जितेंद्र गोलछा, सचिव खुशी कोचर ने संयुक्त रूप से जानकारी दी कि इस टूर्नामेंट के अंतर्गत कई फॉर्मेट में JPL क्रिकेट प्रतियोगितायें आयोजित की जायेगी जिसमें सबसे प्रमुख रूप से प्रदेश के युवा जो राज्य और राष्ट्र का प्रतिनिधित्व कर सकें उनके लिए छत्तीसगढ़ के प्रमुख 8 शहरों की टीम बनाई गई है। इन टीमों में प्रदेश के प्रतिभावान खिलाड़ियों का चयन कर इन 8 टीमों में शामिल किया जा रहा है इन चयनित खिलाड़ियों को मान्यता प्राप्त एकेडमी से प्रशिक्षण दिला कर अंतराष्ट्रीय नियमों और मानकों के अनुरूप IPL की तर्ज में JPL- छत्तीसगढ़ चैम्पियंस ट्रॉफी डयूजबॉल फॉर्मेट में कराया जा रहा है।
इसी तरह छत्तीसगढ़ प्रदेश की ख्याति सम्पूर्ण भारत में बढ़े और समाज के युवा जो व्यापार के बाद खेलों से जुड़कर नशामुक्त, तंदुरुस्त और निरोगी रहे इसके लिए वीर स्पोर्ट्स- JPL- 2 राष्ट्रीय स्तर पर 48 टीमों के मध्य टेनिस बॉल फ्लड लाइट नॉकआउट क्रिकेट प्रतियोगिता जिसमें 16 टीम रायपुर, 16 टीमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से और 16 टीमें प्रदेश के बाहर की खेलने जुटेंगी।
इस टूर्नामेंट के माध्यम से मातृत्व शक्ति को बढ़ावा मिले और वें घरों के चौका बर्तन से निकल कर मैदान में खेलें इसके लिए JPL- वुमेन्स क्रिकेट लीग टेनिस बॉल फ्लड लाइट प्रतियोगिता कराई जा रही है। 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे जो हमारी भावी पीढ़ी है उन्हें प्रोत्साहन देने JPL- अंडर 14 टेनिस बॉल क्रिकेट प्रतियोगिता कराई जायेगी
इन प्रतियोगिता के अलावा समाज के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों से आपसी सद्भावना और भाईचारा बढ़ाने के उद्देश्य से विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी,जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों, डॉक्टर्स, पत्रकार बंधुओं, चार्टर्ड एकाउंटेंट, अधिवक्ता, पुलिस अधिकारी एवं प्रशासनिक अधिकारियों के मध्य मैत्री क्रिकेट मैच का आयोजन कराया जाना सुनिश्चित है।
इस सम्पूर्ण आयोजन में लगभग 68 टीमों में 1000 से भी ज्यादा खिलाड़ी दिन रात 12- 25 दिसम्बर 2017 के मध्य आउटडोर स्टेडियम बूढ़ापारा, रायपुर में खेलने उतरेंगे।
इस आयोजन में प्रदेश के साथ अन्य राज्यों के युवा बड़ी संख्या में शामिल होंगे जिन्हें ध्यान में रखते हुए राजधानी रायपुर के व्यापार को JPL आयोजन के माध्यम से विस्तार मिल सके इसके लिए इस आयोजन के साथ व्यापार प्रदर्शनी और आनंद मेले का भी संयुक्त रूप से आयोजन स्टेडियम में किया जा रहा है। जिससे खेल का खेल और व्यापार से भी मेल हो सके।

प्रवीण जैन
प्रदेश अध्यक्ष
वीर फाउंडेशन छत्तीसगढ़, 9300350000

छत्तीसगढ़ प्रदेश का सबसे बड़ा क्रिकेट आयोजन

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VEER Sports JPL-2

जैन प्रीमियर लीग-२ जिसके अंतर्गत ला रहें हैं 6 प्रमुख प्रतियोगितायें…

(1), JPL- Champions Trophy

IPL की तर्ज पर डयूजबॉल से छत्तीसगढ़ की 8 टीमों के मध्य लीग प्रतियोगिता
(वास्तविक क्रिकेट)???

2, VEER Sports JPL
?? राष्ट्रीय स्तर पर 48 टीमों के मध्य टेनिस बॉल फ्लड लाइट नॉकआउट क्रिकेट प्रतियोगिता
(मनोरंजन क्रिकेट)??‍♂?

3, JPL- Woman’s Cricket League
4 टीमों के मध्य टेनिस बॉल फ्लड लाइट लीग प्रतियोगिता
(महिला सशक्तिकरण)???

(4), JPL – Under 14 Boys
14 वर्ष से कम आयु के बच्चों की 4 टीमों के मध्य टेनिस बॉल प्रतियोगिता
(भावी पीढ़ी को प्रोत्साहन)???

(5), JPL Friendly Match
विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी,जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, डॉक्टर्स, पत्रकार, CA, अधिवक्ता, पुलिस एवं अधिकारियों के मध्य 4 दोस्ताना क्रिकेट मैच
(आपसी भाईचारा और सदभावना की मिशाल
??‍⚕??‍???‍⚖??‍✈????‍?

कुल: 68 टीमें, 1000 से भी ज्यादा खिलाड़ी दिन रात खेलेंगे राजधानी रायपुर में…

तिथि:- 14 – 25 दिसम्बर 2017
स्थान:- वीर छत्रपति शिवाजी स्टेडियम, बूढ़ापारा, रायपुर

⚽ JPL- फुटबॉल प्रीमियर लीग ⚽
स्व. श्रीमती मोहनी देवी बेगानी स्मृति
26 से 28 जनवरी 2018, सप्रेशाला, रायपुर

“सब जैन जुटें, सब जैन जुड़ें”

अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें:-

Adv. Praveen Jain 9300350000
www.veerfoundation.org

धन्यवाद

VEER Foundation

खेल को प्रोत्साहन देने वीर स्पोर्ट्स क्लब का गठन कर कार्यकारणी घोषित की गई

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रायपुर: वीर फाउंडेशन के तत्वाधान में एक महत्वपूर्ण बैठक सिविल लाइन स्थित वृंदावन हॉल में आहूत की गई। जिसमे युवाओं को खेल संस्कृति से जोड़कर स्वस्थ, सेहतमंद रहने, नशा मुक्त बनाने, प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ी तैयार करने के उद्देशय से वीर स्पोर्ट्स क्लब की नींव रख प्रदेश स्तर पर कार्यकारणी का गठन कर विभिन्न खेल आयोजनों की घोषणा की गई।

संस्था अध्यक्ष प्रवीण जैन ने जानकारी देते हुए बतलाया कि विगत जनवरी माह में जैन प्रीमियर फ्लड लाइट क्रिकेट प्रतियोगिता कराई गई थी जिसे सभी ने सराहा था तथा प्रदेश से 600 खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में भाग लिया था अब इस टूर्नामेंट को कई फॉर्मेट में लाया जा रहा है। टेनिस बॉल फॉर्मेट में महिलाओं को प्रोत्साहन देने महिला क्रिकेट टूर्नामेंट, भावी खिलाड़ी ढूढने अंडर 16 क्रिकेट टूर्नामेंट, खेल मनोरंजन हेतु फ्लड लाइट नॉकआउट क्रिकेट टूर्नामेंट जिसमे 32 टीमें पूरे प्रदेश से भाग लेंगी।
इसके अलावा वास्तविक क्रिकेट से युवाओं को जोड़ने अब तक की सबसे बड़ी पहल डयूज बॉल से लीग टूर्नामेंट आयोजित किया जायेगा। जिसमे 8 टीमों में खेलने प्रदेश से 200 खिलाड़ियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। श्री जैन ने बतलाया कि क्रिकेट के अलावा प्रदेश में अन्य सभी प्रकार के खेलों को बढ़ावा देने कार्य किया जा रहा है जिसके अंतर्गत अगस्त में प्रदेश स्तरीय शतरंज और कैरम प्रतियोगिता कराई जानी है।
बैठक में सर्वसम्मति से खेल की गतिविधियों को लगातार संचालित करने हेतु छत्तीसगढ़ स्तर पर वीर स्पोर्ट्स क्लब की स्थापना कर  कार्यकारणी बनाई गई है जिसमे खेल को प्रोत्साहन व बढ़ावा देने वाले जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, समाज सेवियों, व्यवसायियों, महिलाओं एवं युवाओं के साथ  प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर के अनुभवी खिलाड़ियों को शामिल किया गया है।
*वीर स्पोर्ट्स क्लब की कार्यकारणी:*
*प्रमुख संरक्षक*
श्री राजेश मूणत जी
*संरक्षक*
श्री मोती लाल झाबक जी
श्री तिलोक बरडिया जी
श्री इंदरचंद धाड़ीवाल जी
श्री पारस चोपड़ा
श्री गजराज पगारिया जी
*मार्गदर्शक मंडल एवं विशेष आमंत्रित सदस्य*
श्री मनीष बोथरा जी (ट्रेवल्स)
श्री नरेन्द्र बुरड़ जी
श्री लोकेश कबड़िया जी
श्री राकेश सरावगी जी
श्री संजय गंगवाल जी
श्री गजेंद्र पाटनी जी
श्री संतोष भंडारी
श्री विवेक पारख जी
श्री नरेन्द्र दुग्गड़ जी
श्री नरेश जैन
*प्रमुख सलाहकार*
श्री महेंद्र कोचर
श्री विजय चोपड़ा
श्री अतुल गोधा
श्री सतीश जैन
श्री भूपेंद्र कोटडिया
श्री चंद्रेश शाह
*प्रशासनिक सलाहकार*
श्री राजेश सिंघी जी
श्री अमित मैसेरी जी
श्री महावीर कोचर
*प्रदेश अध्यक्ष*
प्रवीण जैन
*कार्यकारी अध्यक्ष*
मनोज बोथरा
*महासाचिव*
पीयूष डागा
*कोषाध्यक्ष*
श्री मयूर बैद
*उपाध्यक्ष*
श्री शीतल कोटडिया
श्री यसवंत जैन
श्री अभिषेक बुरड़
 श्री विकास कोटेचा
*सचिव*
1, चित्रांक चोपड़ा
2, पीयूष बोथरा
3, जय लुनिया
4, धीरज लोढा
*संयुक्त सचिव*
जय सांखला
दिलीप बोरार
संजय दुग्गड़
श्रीमती प्रियंका लुंकड़
*प्रवक्ता*
श्रीमती ममता जैन
श्री शेखर बैद
श्री मनीष लोढ़ा
श्रीमती रचना अजमेरा
*संयुक्त कोषाध्यक्ष*
श्री विवेक सांखला
श्री लिलेश गोठी
श्री विजय सांखला
श्री पंकज मूणत
*अनुशासन समिति*
1, श्री गौतम लुंकड़
2, श्रीमती मंजू टाटिया
3, श्री राजेश रज्जन जैन
4, श्रीमती संगीता जैन
5, श्रीमती किरण जैन
6, श्री सौरव कोठारी
7, श्री राकेश बोथरा
8, श्री रवि गिडिया
*संयोजक महिला टीम*
श्रीमती सविता जैन
श्रीमती अनुभा टाटिया
*सह संयोजक महिला*
श्रीमती प्रणिता सेठिया
श्रीमती जया जैन
*मीडिया प्रभारी*
श्री जैन जितेंद्र गोलछा
श्री प्रियेश जैन
श्री राजेन्द्र पारख
श्री प्रबोध जैन
*तकनीकि सलाहकार*
श्री राहुल रामपुरिया
श्री अंकित बाफना
श्री गौरव कोटडिया
श्री विपिन श्री श्री माल
*सरगुजा प्रभारी*
श्री मनोज जैन अधिवक्ता जशपुर
श्री शिवांश जैन चिरमिरी
श्री मयंक जैन मनेंद्रगढ़
*बिलासपुर संभाग*
श्री भूपेंद्र चंदेरिया बिलासपुर
श्री मनोज जैन भाटापारा
श्री सुशील जैन नैला
श्री राहुल बोहरा कोरबा
श्री नीरज जैन पेंड्रा गौरेला
*दुर्ग संभाग*
श्री ऋषभ जैन पार्षद दुर्ग
श्री ज्ञानचंद जैन भिलाई
श्री अमित जैन बेमेतरा
बस्तर संभाग
श्री मनीष सुराणा दंतेवाड़ा
श्री नवीन बोथरा जगदलपुर
श्री सुमित कटारिया केशकाल
श्री नमन जैन भानुप्रतापपुर
*कार्यकारणी सदस्य*
श्रीमती ज्योति जैन
दिवस चोपड़ा
पूर्वेश बैद
श्रेयांस दस्सनी
अभय बरलोटा
पीयूष कानुगा
पवन दुग्गड़
राजेश बरलोटा
सुमित बोथरा
दीपक फुलफगर
विजय बाफना
दिलीप मालू
पंकज सुराना
विनोद सांखला
जितेंद्र सेठिया।
*प्रवीण जैन*
अध्यक्ष
वीर फाउंडेशन रायपुर
9300350000

झीरम घाटी कांड: कांग्रेसी नेताओं की हत्या सबसे बड़ा अनसुलझा रहस्य!

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sameer

रायपुर। 25 मई 2013 को बस्तर के झीरम घाटी में हुए वारदात का सच क्या है? क्या इस हमले को किसी षडय़ंत्र के तहत अंजाम दिया गया था? क्या ये ‘आन-द-स्पाट’ किया गया हमला था? क्या कांग्रेसी नेता, नक्सलियों की किसी गफलत के शिकार हुए थे? क्या तात्कालीन पीसीसी अध्यक्ष नंदकुमार पटेल की हत्या प्रायोजित थी? क्या नक्सलियों ने ‘सुपारी’ ली थी?  क्या कांग्रेसी नेताओं के काफिले को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई थी? झीरम कांड की चौथी बरसी पर आज इस वारदात से जुड़े कई ऐसे प्रश्न खड़े हुए हैं, जिनका उत्तर कभी मिल पाएगा, इस पर संदेह अब पूरी तरह से गहराने लगा है। आज चौथी बरसी पर ब्लास्ट न्यूज़ इस वारदात से जुड़े कई ऐसे विषयों को उकेरने जा रहा है, जिन पर चर्चाएं होनी तक अब बंद हो चुकी है।

1इस वारदात का सबसे बड़ा रहस्य पटेल की हत्या है। वारदात के करीब साल भर पहले जब पीसीसी अध्यक्ष के रुप में नंदकुमार गरियाबंद क्षेत्र से किसान यात्रा करके लौट रहे थे, तब उनके काफिले पर नक्सलियों ने हमला कर दिया था। इस हमले में एक कांग्रेसी नेता की मौत हो गई थी। हमले के बीच प्रतिउत्तर न मिलने पर नक्सलियों ने फायरिंग रोक दी थी। तब इन्हें (नक्सलियों को) ज्ञात हुआ कि ये कांग्रेसियों का काफिला है। इन्होंने इस काफिले को पुलिस जवानों का काफिला समझकर हमला किया था। वास्तविकता ज्ञात होने के बाद नक्सलियों ने घायल कांग्रेसियों को पानी पिलाते हुए इनका प्राथमिक उपचार भी किया था। चलते-चलते इन्होंने कांग्रेसियों सहित पटेल से इस हमले को ‘भूलवश’ बताते हुए क्षमा भी मांगी थी। छत्तीसगढ़ जब अलग राज्य बना, तब पटेल यहां के पहले गृहमंत्री बने थे। उन्हीं के कार्यकाल में आपरेशन ग्रीनहंट शुरु हुआ था, जिसका विरोध आज भी गाहेबगाहे नक्सली करते ही रहते हैं। इस आपरेशन को लेकर नक्सलियों ने नेताओं को परिणाम भी भुगतने की चेतावनी देते रहे हैं। पर गरियाबंद हमले में जब पटेल सीधे नक्सलियों के साफ्ट टारगेट पर थे, तब हमले को लेकर उनसे क्षमा मांगी जाती है। और ठीक एक साल के बाद झीरम घाटी में उनकी हत्या कर दी जाती है। इसे लेकर ढेरों प्रश्न खड़े हो रहे हैं-
1-वारदात के समय नक्सली, पटेल और उनके पुत्र को घटनास्थल से करीब सौ मीटर दूर क्यों लेकर गए?
2-क्या नक्सलियों के किसी लीडर ने पटेल से वहां बात की?
3-क्या नक्सली, पटेल से कोई जानकारी लेना चाहते थे?
4-किन परिस्थिति में पटेल की नृशंस हत्या की गई?
5-उनके पुत्र को क्यों मारा गया?

2वारदात के दौरान साथ रहे प्रत्यक्षदर्शियों ने मीडिया को बताया था कि हमले के बीच नक्सली महेंद्र कर्मा को ढूंढ रहे थे। इस बीच वो कई लोगों को मार भी चुके थे। नक्सलियों की क्रूरता को देखते हुए कर्मा को ऐसा लगा कि शायद उन्हें मारने के लिए ही नक्सलियों ने ये हमला किया था। बयानों के अनुसार, तब कर्मा अपनी गाड़ी से नीचे उतर आए और उन्होंने नक्सलियों को आवाज दे दी। कर्मा को देखते ही नक्सलियों की फायरिंग थोड़ी देर रुकी। कर्मा को पकड़कर वे थोड़ा आगे ले गए। उन पर गोलियों के अतिरिक्त चाकू से भी हमला किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कर्मा के सीने की हड्डिया टूटी मिली। कहा गया कि कर्मा को मारने के बाद नक्सलियों ने उनके सीने पर खड़े होकर नाच भी किया था जिससे उनकी हड्डियां टूटी थी। कर्मा को बस्तर टाईगर के नाम से भी जाना जाता था। साल-2005 में शुरु हुए सलवा जुडूम के अग्रणियों में उनकी गिनती होती है। कर्मा दुस्साहसी थे। घोर नक्सली क्षेत्र में वे बाइक से घूम आया करते थे। इन्हीं परिस्थितियों में नक्सलियों ने उन पर दो बार हमला भी किया था। इन हमलों में वो बाल-बाल बचे थे। उसके बाद राज्य सरकार ने उन्हें जेड-प्लस श्रेणी की सुरक्षा दी थी। सदा बुलेटप्रूफ कार में घूमने वाले कर्मा ने रैली के बाद अपनी कार क्यों छोड़ी, इसे लेकर भी लगातार प्रश्न हो रहा है, पर झीरम के अन्य प्रश्नों की तरह, इसका भी उत्तर नहीं मिल पाया है।

vकभी राष्ट्रीय राजनीति के पर्याय्य रहे विद्याचरण उर्फ ‘विद्या भैया’ भी इस हमले के शिकार हुए। उन्हें नक्सलियों की तीन गोली लगी थी। 84 साल के विद्याचरण को हमले के बाद गुडग़ांव के मेंदाता हास्पीटल में भर्ती कराया गया था। 18 दिनों तक जीवन और मृत्यु से संघर्ष करने के बाद अंतत: 11 जून को उन्होंने प्राण त्याग दिए। वे 58 साल तक सक्रिय राजनीति में बनें रहे। उम्र के इस पड़ाव में उनकी राजनीतिक और शारीरिक इच्छाशक्ति गजब की थी। इस हमले में पटेल, कर्मा, शुक्ला के अतिरिक्त पूर्व विधायक उदय मुदलियार सहित कुल 32 नेता-पुलिसकर्मी मारे गए थे।

क्या ‘आन-द-स्पाट’ किया गया हमला
हमले के बाद सूचनाओं के माध्यम से ये बात सामने आई थी कि पांच सौ से ज्यादा नक्सलियों ने इस वारदात को अंजाम दिया था। इसके लिए वो कई दिनों से तैयारी कर रहे थे। दूसरी ओर एनआईए ने जब जांच शुरु की तब इसी एजेंसी के एक अफसर ने मीडिया से ये कहा था-‘नक्सली इस हमले को लेकर तैयारी कर रहे थे। उन्हें सूचना थी कि यहां से फोर्स निकलने वाली है।Ó प्रकाशित समाचारों के अनुसार, उक्त अधिकारी ने दावा किया था कि 25 मई 2013 की उस दोपहर तक स्थिति यह थी कि अगर कांग्रेस की जगह किसी अन्य पार्टी का भी काफिला उस मार्ग से लौट रहा होता तो उस पर भी हमला हो सकता था। हालांकि उक्त अधिकारी के इस दावे का खंडन न तो पुलिस ने, न ही विपक्ष ने और न ही नक्सलियों की ओर से किया गया।

राजनीतिक षडय़ंत्र के आरोप कितने सत्य?
झीरम हमले में प्रदेश कांग्रेस की अग्रिम पंक्ति के कई नेता मारे गए थे। इस हमले के बाद से अब तक इस हमले को लेकर राजनीतिक षडय़ंत्र के आरोप लगाए जाते रहे हैं। सत्ता और विपक्ष से जुड़े प्रमुख नेताओं पर आरोप लगाए जा रहे हैं। एनआईए ने अपनी जांच में इस वारदात को राजनीतिक षडय़ंत्र मानने से मना कर दिया। इसके बाद से ही विपक्ष सीबीआई जांच की मांग कर रहा है। विपक्ष के लगातार दबाव के बीच राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की अनुशंसा तो कर दी, पर वो जांच अब तक शुरु नहीं हो पाई है। इधर, आज झीरम कांड की चौथी बरसी पर कांग्रेस भवन में आयोजित पत्रवार्ता में पीसीसी प्रमुख भूपेश बघेल ने ये कहकर फिर से सनसनी फैला दी कि झीरम का सच इसलिए सामने नहीं लाया जा रहा है कि इससे कई राजनीतिक लोगों के चेहरे बेनकाब हो जाएंगे!

लाखों साल पहले पैदा हुए थे असली बाहुबली, कौन था ये भारत का असली हीरो…? अहिंसा न्यूज

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 इन दिनों सारे देश में सिर्फ बाहुबली फिल्म को लेकर चर्चाओं का दौर चल रहा है। मनो देश में कोई त्यौहार आया हो और हर कोई इसे उत्साह के साथ मना रहा हो। डायरेक्टर एसएस राजामौली की इस फिल्म ने इतिहास रच दिया है। हर किसी की जुबान पर सिर्फ बाहुबली ही छाया हुआ है। लोग यह जानकर सुकून की सांस ले रहे हैं कि आखिर कट्टप्पा ने बाहुबलि को क्यों मारा लेकिन हम में से अधिकतर लोग इस बात से अंजान है कि हमारे देश भारत में लाखों साल पहले एक असली बाहुबलि ने जन्म लिया था। जिसके शौर्य और पराक्रम के बारे में देवलोक में भी चर्चाएं होती थी। जिसके सामने चक्रवर्ती का चक्रवर्तित्व भी बौना हो जाता है। आज हम आपको ऐसे ही भारत के वीर असली बाहुबली से रूबरू कराने वाले हैं।
जैन मान्यता के अनुसार पहले तीर्थंकर ऋषभदेव के भारत-बाहुबली को मिलाकर100 पुत्र थे। दोनों की वीर और पराक्रमी भी थे। ऐसा मान जाता है कि इनके पुत्र भरत के नाम पर ही इस देश का नाम भारत पड़ा। ऋषभदेव अयोध्या के इक्ष्वाकु वंश का राजा थे। समय के बीतने पर कल्पवृक्षों का अभाव हो गया। इसके बाद ऋषभदेव ने राज्य के लोगों को असि, मसि और कृषि की शिक्षाएं दी। कुछ समय पश्चात निलांजना नाम की नृत्यकी की नृत्य के दौरान मृत्यू हो जाने पर उन्हें वैराग्य हो गया और वे संसारता की आसारता जानकर वैराग्य धारण कर जैन मुनि दीक्षा लेकर वन को चले गए। दीक्षा से पूर्व उन्होंने अपने राज्य को भरत-बाहुबली समेत सौ पुत्रों में बांट दिया।
आयोध्या का राज्य उनके पुत्र भरत को मिला जबकि छोटे भाई बाहुबली को मिला अस्माका का राजपद मिला। दक्षिण भारत में. इसकी राजधानी हुआ करती थी पोदनपुर। एक दिन भरत अपने दरबार में बैठे हुए थे. उन्हें एक के बाद एक तीन शुभ समाचार मिले. सबसे पहले माली ने आ कर बताया कि उनके पिता ऋषभदेव की साधना सफल हुई है. दूसरा शुभ समाचार मिला आयुधशाला से नौरत्नों के जरिए उन्हें चमत्कारी चक्र की प्राप्ति हुई है. तीसरा समाचार मिला रानीवास से कि उन्हें बेटा हुआ है.
चक्ररत्न की प्राप्ति होने पर उन्होंने वे युद्घ पर निकल गए और छह खंडो को जीतकर वापस लौटे। अब पूरी दुनिया में सिर्फ बाहुबलि का राज्य पोदनपुर ही बचा था। जिसे वो नहीं जीत चके । इसके लिए उन्होंने बाहुबली को दासता स्वीकार करने के लिए पत्र भेजा लेकिन बाहुबलि ने दासता स्वीकार नहीं की। इसके बाद क्रोधित भरत ने बाहुबलि के ऊपर चढ़ाई कर दी। लेकिन भरत से हजार गुनी कम सेना होने के बाद भी वे घबराए नहीं। वे यह जानते थे कि सारी दुनिया को भरत जीत चुके हैं फिर भी उन्हें अपने सामर्थ पर यकीन था और वे युद्घ करने रणभूमि में आ गए।
जैसे ही युध्द का उदघोष हुआ। तभी प्रबुद्घजनों ने संबोधन किया कि उनके पिता तो अंहिसा के पथिक हैं फिर उनके पुत्र युद्घ का तांडव कर हिंसा कैसे कर सकते हैं तब उनमें तय हुआ कि सेना के बिना ही सिर्फ भरत बाहुबलि के बीच तीन तरह का युद्घ होगा। सबसे पहले दृष्टि युद्घ हुआ, उसके बाद जल युद्घ और मल्ल युद्घ तीनों ही तरह से युद्घ में विश्वविजेता भरत को बाहुबलि ने हरा दिया। इसे देखकर पूरी दुनिया में बाहुबली का गुणगान होने लगा। तभी हार से क्रोधित भरत ने अपना चक्ररत्न अपने छोटे भाई भरत पर चला दिया। लेकिन चक्ररत्न भी बाहुबलि के तीन परिक्रमा कर वापस लौट गया। क्योंकि चक्ररत्न सगे सबंधियों पर नहीं चलता इसलिए यह प्रयोग भी भरत का व्यर्थ गया।
भरत को जीतने के बाद धीरोदात्त बाहुबलि को वैराग्य आ गया उन्हें लगा कि नष्ट हो जाने वाले इस राज्य के लिए भाईयों में लड़ाई हो गई। भरत खून का प्यासा हो गया। इस तरह से संसार के दुख देखकर उन्होंने भी भरत को अपना राज्य देकर दीक्षा धारण कर ली और घोर तपस्या कर अपने पिता के मार्ग पर चलकर मोक्ष की प्राप्ति की। 

बाहुबलि की विश्व की सबसे ऊंची 57 फीट की प्रतिमा कर्नाटक श्रवणबेलगोला में आज भी उनके पराक्रम और अदभुत कौशल की कहानी कह रही है। हमें यह सब मिथक लग सकता है लेकिन भारत को गौरवशाली इतिहास में बाहुबलि आज भी अमर हैं। हां ये जरूर है कि असली बाहुबली को आज हमने भुला दिया। लेकिन वो हमेशा अमर थे, अमर हैं उनकी विजय पताका आज भी गोम्मटेश बाहुबलि के रूप में दुनिया देखर रही है। इस प्राचीन प्रतिमा का निर्माण वर्ष 983 में यहां के गंग शासक रचमल्ल के शासनकाल में चामुण्डराय नामक मंत्री ने बाहुबली की इस विशाल प्रतिमा का निर्माण करवाया था. भारतीय राज्य कर्नाटक के मड्या जिले में श्रवणबेलगोला के गोम्मटेश्वर स्थान पर स्थित महाबली बाहुबली की विशालकाय प्रतीमा जिसे देखने के लिए विश्‍व के कोने-कोने से लोग आते हैं। बाहुबली की विशालकाय प्रतिमा पूर्णत: एक ही पत्थर से निर्मित है। इस मूर्ति को बनाने में मूर्तिकार को लगभग 12 वर्ष लगे। बाहुबली को गोमटेश्वर भी कहा जाता था।
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रमन सिंह सरकार को तत्काल भंग कर, राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए: भूपेश

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राv-17यपुर: बस्तर सुकमा के बुरकापाल इलाके में नक्सली वारदात में सीआरपीएफ के 25 जवानों के शहादत को नक्सलियों के घिनोनी हरकत बताते हुये प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल ने इस घटना के लिये सीधे मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को पूर्ण रूपेण जिम्मेदार ठहराया है। सरकार के मुखिया होने के नाते डाॅ. रमन सिंह बस्तर में हो रहे लगातार नक्सली वारदातों के लिये अपनी जिम्मेदारी से किसी तरह नहीं बच सकते। आप 13 वर्षो से युनिफाइड (संयुक्त) कमान के प्रमुख है बावजूद इसके केन्द्रिय पुलिस बल एवं राज्य पुलिस बल के बीच कही कोई समन्वय एवं सामजस्य नही है स्थानीय पुलिस से सहयोग नही मिल पाने के कारण (जिसकी पुष्टि स्वंय घायल जवान ने भी की है ) इस नक्सली वारदात में सीआरपीएफ के जवानों को शहादत देनी पड़ी। भाजपा सरकार के लगातार प्रमुख रहने के बावजूद राज्य में बढ़ रही नक्सली प्रभाव को रोकने में रमन सिंह जी आप पूरी तरह नाकाम रहे है। राज्य सरकार पर नक्सलियों से सांठ-गाठ के भी लगातार आरोप लगते रहे है। मिले कुछ प्रमाणो से इन संदेहो की पूष्टि होती है। सरकार का दामन यदि पाक साफ होता तो झीरम जैसे दहला देने वाली घटना के षड़यत्र पर सरकार परदा डालने पर क्यो लगी रहती है।
जिस कांग्रेस पार्टी को अपने अनेक दिग्गज नेताओं को इस झीरम कांड में खोना पड़ा। उन्हीं के नेताओं द्वारा लगातार घटना के षड़यंत्रो की सीबीआई जांच की मांग को सरकार क्यो अनदेखा करती रहीं है? जिन लोगो पर षड़यंत्र में शामिल होने का संदेह आम जनों  के जूबान पर बर्बश ही आ जाता है आखिर सरकार क्यो ऐसे लोगो को बचाने में लगी रहती है। जांच कराने की मांग से क्यो मुंह फेर लेती है? ऐसे कई प्रश्न है जिसके चलते सरकार और नक्सलियों के बीच सांठ-गाठ का अनदेशा होना स्वभाविक रूप से परिलक्षित होता है। सुकमा जहां नक्सली बार-बार अपने खौफनाक वारदातो को अंजाम देकर सैकड़ो जवानों को मौत के मुंह मे ढ़केलने में कामयाब हो जाते है, वही मुख्यमंत्री मोटर सायकल में घूमने का नौटंकी करते है और नक्सली चूं तक नहीं करते किन्तु हजारो की संख्या में सुरक्षा बलो की तैनाती के बावजूद नक्सली यदि वारदात को अंजाम देने का दुःशाहस करने में सफल हो जाते है तो कही न कही लोगो के मन में सरकार के प्रति संदेह उत्पन्न होना लाजमि है।
कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने राज्य सरकार पर नक्सली अभियान हेतु प्राप्त केन्द्रिय सरकारी संसाधनो का उपयोग नहीं करने का आरोप लगाते हुये कहा की हैलिकाप्टर होने के बावजूद घटना स्थल पर तत्काल क्यो नही पहुंच पाई जबकि 3 घंटो तक लड़ाई जारी रही जिसके कारण नक्सलियों से भिड़ रहे जवानों को तुरंत बैकअप सपोर्ट नहीं मिल पाया। पास ही में सीआरपीएफ के कैम्प, कोरबा बटालियन कैम्प होने के बावजूद तत्काल बैकअप क्यो नही दिया गया जिसके चलते इतनी बड़ी संख्या में जवानो को जान से हाथ धोना पड़ा।
झीरम कांड के कुछ महीने बाद ही अब के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बस्तर आये थे उन्होंने 15 दिन के अंदर इस कांड के आरोपी को पकड़ लिये जाने की घोषणा की थी किन्तु ढ़ाई साल बाद आरोपीयों के पकड़े जाने की बात तो दूर जब पकड़े गये नक्सलियों की शादी करवाने में पूरा शासन प्रशासन लग जाता है तो जनता सहित विपक्ष के मन में सरकार और नक्सलियों के मिली भगत होने के संदेहो को प्रमाणित करता है।
रमन सरकार शराब बेचने और कमीशनखोरी में व्यस्त है जिसके चलते उनके पास कानून व्यवस्था को ठीक करने का  समयाभाव है। सरकार बताये बस्तर के संवेदनशील नक्सली क्षेत्र में कितने जिला पुलिस बल, इस्पेक्टर, सब इस्पेक्टर, एएसआई, एसआई, हेड कांस्टेबल कांस्टेबल तथा कितनी महिला पुलिस बल तैनात है केवल सीआरपीएफ के बदौलत कानून व्यवस्था बना नही सकते। इन दिनो सरकार व अधिकारियों की लड़ाई का खामियाजा आम जनों से लेकर जवानों तक को उठानी पड़ रही है। जिसका सीधा उदाहरण ताडमेटला और मदनवाड़ा के घटना में मृत लगभग 100 जवान इसी क्रम के हिस्सा थे। इस सरकार में नैतिक्ता नाम की चीज नहीं है, हम माननीय राष्ट्रपति महोदय से छत्तीसगढ़ में अविलंब राष्ट्रपति शासन लगाये जाने की मांग करते है।